लखनऊ। जालसाजी के मामले में गिरफ्तार इंडसइंड बैंक की चिनहट शाखा का डिप्टी मैनेजर उत्तम कुमार विश्वास ने दस महीनों में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अपने खातों में मंगाई थी, जिन्हें फर्जी दस्तावेजों की मदद से खोला गया था। जांच में कुछ अन्य बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पुलिस व साइबर क्राइम सेल की टीम उस पर काम कर रही है।
ठगी की रकम मंगवाने के लिए जालसाजों ने कॉर्पोरेट खातों का प्रयोग किया था। जांच में पता चला है कि सनराइज सोल्यूशन प्रा. लि., एरिस्टा ई कॉमर्स प्रा. लि. और प्रकाश फाउंडेशन ट्रस्ट के नाम से संस्था बना रखी थी। पूछताछ में सामने आया कि चिनहट के इंडसइंड बैंक खाते में सिर्फ तीन माह के अंदर छह करोड़ रुपये ठगी के जमा कराये गए। इसका कमीशन डिप्टी ब्रांच मैनेजर उत्तम और उसकी पत्नी के खाते में दिया गया है। आरोपियों ने इंडसइंड बैंक के विनम्र खंड शाखा में भी खाता खुलवाया था, जिसमें ठगी की रकम आने के बाद फ्रीज कर दिया गया।
इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना बृजेश कुमार यादव ने बताया कि उत्तम विश्वास ने पूछताछ में बताया कि करीब दस महीने में इस गिरोह के साथ काम कर रहा है। इस दौरान उसके पास काफी रुपये आए। ज्यादातर रुपये पत्नी के खाते में मंगाया। 27 अक्तूबर को उसने पत्नी के नाम पर करोड़ों रुपये की जमीन खरीदी। वहीं, करीब 30 लाख रुपये के जेवर खरीदे हैं। साइबर क्राइम पुलिस ने छह नवंबर को को जालसाजों की मदद करने वाले आरोपी डिप्टी ब्रांच मैनेजर उत्तम कुमार और उसके दो साथियों बभनान निवासी उमाकांत और खम्हरिया का निवासी राजीव विश्वास को गिरफ्तार किया था।
