
जूता कारोबारियों पर आयकर छापा
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दुनियाभर में मशहूर आगरा का घरेलू जूता कारोबार 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। जूता बाजार में नोट की जगह पर्ची से बड़ा लेनदेन होता है। पर्ची से कारोबार का हींग की मंडी सबसे बड़ा केंद्र है। बड़े व्यापारी मामूली कमीशन काटकर पर्ची से करोड़ों रुपये का नकद भुगतान कर देते हैं।
बड़े जूता कारोबारी, छोटे व्यापारियों को रकम के बदले पर्ची देते हैं। जिन्हें कारोबारी जरूरत के मुताबिक भुना लेते हैं। इससे एक तरफ व्यापार में नकदी दिखाई नहीं देती। दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर टैक्स में हेराफेरी होती है। पर्चियों का यह खेल 100 से अधिक बड़े जूता व्यापारियों की साख पर चल रहा है। हींग की मंडी से लेकर गली-मुहल्लों तक फैला यह कारोबार एक तरह से उधार और वायदा कारोबार है। हरमिलाप ट्रेडर्स के रामनाथ डंग को पर्ची कारोबार का किंग माना जाता है। जूता कारोबारियों के मुताबिक पर्ची को भुनाने के बदले 50 पैसा प्रति सैंकड़ा से तीन प्रतिशत तक का ब्याज लिया जाता है।
