Indifference towards insurance can increase problems



इटावा। बीते कई दिनों से आसमान से बरस रही आफत और ओलावृष्टि ने जिले के किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में बिछी गेहूं की सुनहरी फसल किसानों को परेशान कर रही है। जिले में लगभग 2.80 लाख किसान पंजीकृत हैं। इस रबी मौसम में महज 10 हजार किसानों ने ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का सुरक्षित घेरा तैयार कराया था। यानी जिले के 95 प्रतिशत से अधिक किसान अब भी किसी भी दैवीय आपदा की स्थिति में पूरी तरह सरकारी मदद या अपनी किस्मत के भरोसे हैं। जिला फसल बीमा प्रभारी राजेंद्र भाटी ने बताया कि अब तक मात्र 380 किसानों ने ही फसल नुकसान के लिए औपचारिक रूप से दावा पेश किया है। बीमा कंपनी के प्रतिनिधि गांव-गांव जाकर फसल के नुकसान का आकलन कर रहे हैं, ताकि मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। जिला कृषि अधिकारी ओंकार सिंह ने बताया कि बीमा कंपनी की टीमें क्षेत्रों में सक्रिय हैं। जिन किसानों ने बीमा कराया है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सर्वेक्षण में शामिल किया जा रहा है। अन्य किसानों के लिए शासन के निर्देशानुसार राजस्व विभाग की टीमें अलग से सर्वेक्षण कर रही हैं।


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