Inspector-Munshi given clean chit in case of woman death due to bullet injury

आरोपी दरोगा मनोज शर्मा
– फोटो : सोशल मीडिया

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अलीगढ़ के ऊपरकोट कोतवाली के मुंशियाने में दिसंबर में हुए गोलीकांड के मुकदमे में आरोपी दरोगा-मुंशी को बड़ी राहत मिली है। गोलीकांड में मृत महिला के परिवार ने घटना को इत्तेफाकिया करार दिया है। जिसके आधार पर पुलिस विवेचना में साक्ष्य न पाए जाने का उल्लेख कर अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। साथ में रिहाई संबंधी रिपोर्ट दी। इसी क्रम में महिला की हत्या के आरोप में जेल में निरुद्ध दरोगा को अदालत के आदेश पर रिहा कर दिया गया। बता दें कि इस घटना का सह आरोपी मुंशी पहले से जमानत पर बाहर था। 

घटनाक्रम के अनुसार तुर्कमान गेट चौकी क्षेत्र के हड्डी गोदाम इलाके के बुजुर्ग हार्डवेयर/ताला व्यापारी शकील खां की पत्नी इशरत निगार (55) पासपोर्ट सत्यापन के सिलसिले में बेटे ईशान संग कोतवाली गई थीं। उन्हें कोतवाली से फोन आया था। दोपहर करीब ढाई बजे के आसपास वे मुंशियाने में पहुंचकर वहां मौजूद मुंशी (कार्यालय पुलिसकर्मी) से बात कर रही थीं। 

 तभी मुंशी सुदीप यादव ने वहां मौजूद दरोगा मनोज शर्मा को मालखाने से उनकी सर्विस पिस्टल निकालकर दी। दरोगा ने वहीं खड़े-खड़े पिस्टल को चेक करते हुए फायर कर दिया। उनको अंदेशा था कि पिस्टल का चैंबर खाली होगा। मगर, पिस्टल से गोली चल गई, जो सीधे दरवाजे की ओर खड़ी महिला की कनपटी के पास जा लगी। 

आनन-फानन महिला को जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। छठवें दिन देर रात महिला को मृत घोषित कर दिया। इस घटना में पहले ही दिन ईशान ने भुजपुर चौकी प्रभारी दरोगा मनोज शर्मा निवासी खिमावती मुरादनगर गाजियाबाद पर हमले का मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसमें बाद में मुंशी सुदीप निवासी तकीपुरा चौबिया इटावा को भी साजिश व लापरवाही का आरोपी बनाया गया था। महिला की मौत के बाद मुकदमा हत्या व साजिश की धारा में तरमीम किया गया था। सुदीप को महिला की मौत वाले दिन दोपहर में जेल भेजा गया था, जो बाद में जमानत पर रिहा हो गया। मगर दरोगा जेल में ही था।



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