संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ

Updated Wed, 20 Nov 2024 12:51 AM IST

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It is mandatory for monks to observe the ten precepts

तपोस्थली ​स्थित ​शिवली स्तूप पर प्रार्थना करते थाईलैंड से आए अनुयायी। संवाद



श्रावस्ती। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड से आए 45 सदस्यीय दल ने तपोस्थली स्थित शिवली स्तूप पर विशेष पूजा की। इस दौरान अनुयायियों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में विश्व शांति की कामना की। बताया गया कि गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वालों के लिए प्रथम 5 शीलों और भिक्षुओं के लिए 10 शीलों का मानना अनिवार्य है।

बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु ने कहा कि सांसारिक दुखों से मुक्ति के लिए बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग की बात कही है। बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति को सरल बनाने के लिए 10 शीलों पर बल दिया है। वह शील हैं अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, मद्य सेवन ना करना, असमय भोजन ना करना, सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना, धन संचय ना करना, स्त्रियों से दूर रहना व नृत्य गान आदि से दूर रहना। पूजन के बाद सभी उपवासको ने कौशांबी कुटी, सभामंडप, सूर्य कुंड, संघाराम विहार, अंगुलिमाल स्तूप, पूर्वा राम विहार का भ्रमण किया।



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