लखनऊ। कचरे के बेहतर तरीके से निस्तारण के लिए शहर में वेस्ट-टू-एनर्जी (कूड़े से बिजली बनाने वाला) प्लांट लगाना जरूरी है। इससे कूड़े से तैयार होने वाली आरडीएफ (सीमेंट फैक्टरियों में जलाने के काम में आने वाली सामग्री) मध्य प्रदेश व अन्य प्रदेशों में भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

केंद्र के शहरी विकास एवं आवासन मंत्रालय की संयुक्त सचिव और स्वच्छ भारत मिशन की निदेशक रूपा मिश्रा ने मंगलवार को शिवरी प्लांट का निरीक्षण करने के बाद नगर निगम अधिकारियों को ये सुझाव दिए। एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शहर आईं रूपम सबसे पहले गोमतीनगर के ग्वारी में नगर निगम की ओर से कूड़ा प्रबंधन के लिए बनाए गए मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर पहुंचीं।

इसके बाद विनीत खंड में कचरा प्रबंधन का काम करने के लिए आई नई कंपनी लखनऊ स्वच्छता अभियान का कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन देखा। शाम करीब पांच बजे वह शिवरी प्लांट पहुंचीं और करीब डेढ़ घंटे तक निरीक्षण किया।

प्लांट प्रभारी डॉ. अरविंद राव ने बताया कि रूपा मिश्रा ने जमा कूड़े के निस्तारण और रोजाना आने वाले कचरे के निस्तारण के लिए चल रहे कामों को देखा। उन्होंने कूड़ा निस्तारण के बाद जमा पुराने और नए कचरे से बनने वाली आरडीएफ की गुणवत्ता भी देखी।

उन्हें बताया गया कि इसे मध्य प्रदेश व अन्य जगह की सीमेंट फैक्टरियों को भेजा जाता है। इस पर रूपम मिश्रा ने सुझाव दिया कि बेहतर कूड़ा प्रबंधन के लिए यहीं पर वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाया जाए। इससे आरडीएफ को 400-500 किमी दूर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

घैला में जमा कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया जानने के लिए वह जाना चाहती थीं, लेकिन पहुंच नहीं सकीं। ऐसे में शिवरी प्लांट पर ही प्रजेंटेशन से उन्हें घैला में जमा कूड़े के पहाड़ और निस्तारण के बाद बदले स्वरूप की तस्वीर दिखाई गई। कूड़ा प्रबंधन को लेकर उन्होंने नगर निगम के प्रयासों की सराहना की।

एनटीपीसी से बिजली प्लांट लगाने की चल रही बात

नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने बताया कि नगर निगम वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाने पर काम कर रहा है। इसे लेकर एनटीपीसी से बात चल रही है। करीब दो महीने पहले नगर निगम सदन की बैठक में प्रस्ताव भी पास कराया जा चुका है। प्लांट पर जमा करीब दो लाख मीट्रिक टन पुराने कूड़े के निस्तारण का काम अलग कंपनी को दिया गया है। रोजाना आ रहे कचरे के निस्तारण का काम अलग कंपनी कर रही है। अभी रोजाना 600 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण हो रहा है। छह महीने में दो और मशीनें लगाई जाएंगी।



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