
वर्ष 2000 में अपने पहले चुनाव के दौरान अखिलेश यादव का तिलक करतीं महिलाएं
– फोटो : आर्काइव
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इत्रनगरी में समाजवाद का बीज बोने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया हों या खुद समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव। लोकसभा चुनाव में यहां से जीत हासिल करने के लिए मिले वोटों में इन दोनों ही नेताओं से अखिलेश यादव को बड़ी जीत हासिल हुई है। दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित भी जीत के मामले में अखिलेश यादव से पीछे रही हैं।
कन्नौज हैट्रिक लगाकर सांसद रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार दो बार एक लाख से भी ज्यादा वोटों से जीत हासिल कर चुके हैं। वर्ष 2004 के चुनाव में वह 307373 वोट के बड़े अंतर से जीते थे। जो कि इस सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत है। उस चुनाव में कुल पड़े 758627 वोट में से उन्होंने करीब 62 फीसदी के साथ 464367 वोट हासिल किया था। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे बसपा के राजेश सिंह को 20 फीसदी के साथ 156994 वोट मिले थे। वोटों के अंतर से यह इस सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत है। न तो उसके पहले और न ही उसके बाद कोई इतने बड़े अंतर से यहां से निर्वाचित हुआ है।
यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। वोटों के अंतर से इतनी बड़ी जीत यहां के पहले सांसद रहे डॉ. राम मनोहर लोहिया को भी नहीं मिली थी। न ही उनके बाद शाीला दीक्षित या मुलायम सिंह यादव को इतनी बड़ी जीत मिली। डॉ. राम मनोहर लोहिया यहां एक प्रतिशत से भी अंतर से जीते थे। वर्ष 1984 में यहां से एक बार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस की दिग्गज नेता रहीं शीला दीक्षित 41.44 फीसदी यानी 199621 वोट पाकर जीती थीं। उनकी जीत का अंतर 62 हजार वोट था। 1999 में मुलायम सिंह यादव 42.63 फीसदी यानी 291617 वोट हासिल कर सांसद बने थे। उनकी जीत का अंतर करीब 79139 वोट था।
