उरई। शहरियों को अप्रैल से गृहकर जमा करने के लिए पालिका दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे घर बैठकर ऑनलाइन कर जमा कर सकेंगे। उन्हें यह सुविधा दिए जाने को लेकर बोर्ड की बैठक में फैसला लिया गया है। पूरे जिले में उरई नगर पालिका की ओर से यह पहली व्यवस्था होगी।
पालिकाध्यक्ष गिरिजा चौधरी की अध्यक्षता में बोर्ड की बैठक हुई। शहर में 34 वार्ड हैं। इसमें करीब 55 हजार शहर वासियों से पालिका 1.25 करोड़ रुपये गृहकर लेती है। कर वसूली के लिए पालिका ने 12 कर्मचारी लगाए हैं। जो वसूली के लिए घर-घर भी जाते हैं। उसके बाद भी हर साल पालिका लक्ष्य का सौ फीसदी नहीं कर पाती है। इसके साथ ही कई लोग पालिका के दफ्तर के चक्कर काटने से परहेज करते हुए कर जमा करना भूल जाते हैं। गृहकर ऑनलाइन किए जाने को लेकर सभासदों की हामी के बाद अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को पास मंजूरी दे दी। अप्रैल से पहले तक इसकी सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधीक्षक गणेश प्रसाद ने बताया कि ऑनलाइन का ठेका एजेंसी को दिया जाएगा। गृहकर जमा करने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर इसकी पुष्टि करता हुआ मैसेज पहुंचेगा। बैठक में जयशंकर द्विवेदी, विपिन सेठ, शायना, मुबीना, रामजीवन, नगमा आदि मौजूद रहे।
89.78 करोड़ का संशोधित बजट पारित
– वर्ष 2023- 24 का संशोधित बजट प्रस्तावित व्यय 89.78 करोड़ है। बजट का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, विकास कार्यों के साथ ही कर्मचारियों के भत्ते पर खर्च होता है। इसमें उपकरण खरीद साफ सफाई और बिजली भी शामिल है। पालिका इन सब पर खर्च करती है। इसे पारित किया गया है।
विमलापति, ईओ,नगर पालिका
10 करोड़ से दूर होंगी वार्डों की समस्याएं
छह करोड़ से सड़क और नाली का होगा निर्माण
गुपचुप ढंग से होने वाले टेंडरों को लेकर हंगामा
उरई।नगर पालिका की बैठक में सभासदों ने वार्डों की समस्याएं उठाई। विकास के लिए 10 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। वहीं टेंडर गुपचुप ढंग से जारी करने पर सभासदों ने हंगामा किया। टेंडर सार्वजनिक कराए जाने की मांग की।
सभासदों ने शनिवार को अपने-अपने वार्डों की प्रमुख समस्याओं को उठाया। इस पर शहर के सभी वार्डों की समस्याओं को दूर करने के लिए 10 करोड़ का बजट पास किया गया। इसमें छह करोड़ रुपये सड़क और नाली निर्माण में खर्च किए जाएंगे। वहीं चार करोड़ रुपये से सफाई के उपकरण, स्ट्रीट लाइट, कर ऑनलाइन के लिए फॉर्म पर खर्च किए जाएंगे।
बोर्ड की बैठक में गुपचुप तरीके से होने वाले टेंडरों को लेकर सभासदों ने हंगामा किया। कहा कि सभी टेंडर सार्वजनिक होने चाहिए। सदस्यों की जानकारी में होने चाहिए। इससे पारदर्शिता रहेगी। उन्होंने भर्ती मामले को उठाया। कहा कि बिना किसी जानकारी के एक फर्म से करीब 100 से अधिक कर्मचारियों की भर्ती हुई। सभासदों ने उन्हें हटाने को लेकर पूरजोर ढंग से अपनी बात रखी। इस पर उन्हें आश्वासन मिला। कहा गया कि छह महीने के अंतराल में जिस फर्म में सफाई कर्मचारी बिना किसी जानकारी के लगाए गए हैं, उस फॉर्म का टेंडर निरस्त होगा। नए तरीके से टेंडर होगा। सदस्यों ने स्ट्रीट लाइटों पर हुए खर्चों का विवरण सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई, जिस पर अध्यक्ष ने आश्वासन दिया।
