मुहम्मदाबाद। गुलाब जल बनाने की आड़ में नशीले पदार्थों की फैक्टरी चलाने के मामले में पुलिस की जांच में नए खुलासे हो रहे हैं। गोहांड में फैक्टरी लगाने की तैयारी कर रहा हेमंत पुलिस की भनक लगते ही वहां से भाग गया था। इसके बाद उसने उरई में ठिकाना बनाया और अपने पुराने परिचितों के जरिए कारोबार का नेटवर्क तैयार करना शुरू कर दिया। इसी दौरान गांधी इंटर कॉलेज में साथ पढ़े रमपुरा निवासी शैलेंद्र सिंह पाल से उसकी दोबारा मुलाकात हुई। बेरोजगारी से जूझ रहे शैलेंद्र को हेमंत ने करोड़ों रुपये कमाने का सपना दिखाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर गुलाब जल बनाने के लाइसेंस और फैक्टरी लगाने की कागजी प्रक्रिया पूरी की। पुलिस के मुताबिक इसी कारोबार की आड़ में नशीले पदार्थ बनाने का खेल शुरू हुआ।

बताया जा रहा है कि हेमंत पहले गोहांड में ही ड्रग्स फैक्टरी लगाने की योजना बना रहा था, लेकिन पुलिस को इसकी भनक लगने पर उसने अपना ठिकाना बदल दिया। उरई पहुंचने के बाद उसकी मुलाकात शैलेंद्र से हुई। दोनों पहले एक ही स्कूल में पढ़ते थे, इसलिए पुरानी जान-पहचान फिर से दोस्ती में बदल गई। बातचीत के दौरान हेमंत ने शैलेंद्र को बताया कि वह जमीन की तलाश में है। इस पर शैलेंद्र ने भी अपनी बेरोजगारी का जिक्र किया। हेमंत ने उसे एक ऐसे कारोबार में साथ आने का प्रस्ताव दिया, जिसमें कम समय में करोड़ों रुपये कमाने का दावा किया गया। आर्थिक लाभ के लालच में शैलेंद्र भी उसके साथ जुड़ गया।

लाइसेंस की आड़ में खड़ा किया कारोबार

जांच के मुताबिक दोनों ने गुलाब जल बनाने की फैक्टरी स्थापित करने के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाए और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की। बाहर से कारोबार को वैध दिखाने की तैयारी की गई, जबकि अंदरखाने नशीले पदार्थों के निर्माण की योजना पर काम चल रहा था। फैक्टरी स्थापित होने के बाद हेमंत ने मुंबई की सांगली जेल में उसके साथ रह चुके संतोष को भी बुला लिया। इसके बाद तीनों के बीच काम का बंटवारा कर कथित तौर पर नशे के कारोबार को आगे बढ़ाने की तैयारी की गई।

पुलिस से बचने के लिए घर में छिपाया तैयार माल

बताया जा रहा है कि हेमंत कारोबार में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता था। इसी वजह से तैयार माल को गोहांड स्थित अपने घर में छिपाकर रखा गया था। उसे उम्मीद थी कि इस तरह फैक्टरी और तैयार माल को पुलिस की नजरों से बचाया जा सकेगा लेकिन पुलिस टीम को सूचना मिलने के बाद छापेमारी की गई तो पूरा मामला सामने आ गया। जांच में कथित तौर पर गुलाब जल बनाने की फैक्टरी की आड़ में नशीले पदार्थ तैयार करने का मामला उजागर हुआ। कार्रवाई के बाद हेमंत और संतोष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

फरार शैलेंद्र की गिरफ्तारी से खुल सकते हैं कई राज

इस पूरे मामले में शैलेंद्र सिंह पाल की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस उसे फैक्टरी संचालन से जुड़े अहम व्यक्ति के रूप में तलाश रही है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस को उसकी लोकेशन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। ऐसे में जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि पुलिस की ओर से अभी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



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