उरई। शिक्षक दुर्वासा यादव उर्फ लालू को जब अपनों ने पहाड़ जैसे गम की जानकारी दी तो उसकी आंख बंद हो गई। आधे घंटे तक लालू ने आंख नहीं खोली। बंद आंख से उसके आंसू बाहर आ रहे थे। अंतिम समय में अपने कलेजे के टुकड़े, धर्मपत्नी और अपनी जननी को नहीं देख पाने का गम उसे बार बार रुला रहा था।
डकोर कोतवाली क्षेत्र के मोहाना गांव के रहने वाले शिक्षक दुर्वासा अपने बहनोई की पिकअप गाड़ी से गांव के ही रहने वाले छात्र-छात्राओं और परिवार के लोगों को घुमाने मध्य प्रदेश के दतिया लेकर गया था। वहां से लौटते वक्त कैथेरी गांव के पास हादसा हो गया। इस दुर्घटना में दुर्वासा की पत्नी प्रियंका देवी, दो साल का बेटा अनुरुद्ध और मां मुन्नी देवी की मौत हो गई। इसमें उसकी एक छात्रा गांव की ही रहने वाली नैंसी की भी मौत हो गई।
हादसे में दुर्वासा भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। मेडिकल कॉलेज में उसकी स्थिति गंभीर होने पर उसे झांसी हायर सेंटर रेफर कर दिया था। लेकिन परिवार के लोग उसे लेकर कानपुर के अस्पताल पहुंचे। यहां उसका इलाज चल रहा है। दुर्वासा पर आफत का पहाड़ टूटने की जानकारी उसके परिवार वाले उसे इस हालत में नहीं बताना चाहते थे।
मंगलवार को उसे देखने जब परिवार से पिता मैयादीन और भाई के कानपुर अस्पताल पहुंचे तो जैसे ही दुर्वासा ने बच्चों और मां के बारे में पूछा, बिलखते हुए परिजन उससे कुछ भी छिपा पाने की हिम्मत नहीं कर सके।
