फोटो – 21 मां अक्षरा देवी की सजी झांकी। संवाद

फोटो – 22 सैदनगर स्थित मां अक्षरा देवी का मंदिर। संवाद

जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर सैदनगर में है मंदिर

संवाद न्यूज एजेंसी

कोटरा। जिला मुख्यालय से करीब चालीस किलोमीटर दूर बेतवा नदी किनारे बसे गांव सैदनगर में स्थापित मां अक्षरा देवी सिद्धपीठ, मां वैष्णो देवी का ही प्रतिबिंब स्वरूप है। इसी मान्यता के चलते यह शक्तिपीठ लोगों के लिए आस्था का बिंदु बना हुआ है। यहां देश के कोने-कोने से लोग माता रानी के दर्शन करने आते हैं और मुरादों को पूरा करते हैं।

कोटरा थाना क्षेत्र के सैदनगर में स्थापित मां अक्षरा देवी का मंदिर अत्यंत प्राचीन है, कहा जाता है कि संवत 1111 में खत्री परिवार द्वारा माता रानी के मंदिर की स्थापना की गई थी। इस परिवार के द्वारा छोटी मडिया बनवाकर पूजा की जाती थी। इसके बाद यह परिवार कालपी कानपुर जाकर बस गया। लगभग 90 वर्ष पूर्व पंडित भागवतानंद सरस्वती देवी मां के दर्शन करने आए और वर्षों तक देवी जी की पूजा आराधना करते रहे।

इसके बाद ग्राम सैदनगर निवासी पूर्व प्रधान भगवती शरण बुधौलिया ने देवी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उनके निधन के बाद उनके भतीजे संतोष पंडा ने मंदिर में पूजा अर्चना प्रारंभ की। वर्तमान में उनके परिवार के ही राजू बुधौलिया व रिंकू बुधौलिया मां अक्षरा देवी की पूजा अर्चना कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि मां अक्षरा देवी का स्वरूप ठीक वैष्णों माता देवी जैसा होने के कारण इनकी बड़ी मान्यता है।

जैसे वैष्णों माता देवी तीन पिंडी महाकाली, महा सरस्वती व महालक्ष्मी का स्वरूप हैं। उसी प्रकार मां अक्षरा देवी का स्वरूप दिखता है, अक्षरा माता देवी के सामने नारियल नहीं तोड़ा जा सकता। जिससे मंदिर के ठीक पीछे भक्त नारियल तोड़कर अपनी मन्नतें मांगते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर के सामने ही कुछ दूरी पर पत्थरों के बीच अथाह कुंड बना हुआ है, जो कभी भी सूखता नहीं है, इसमें हमेशा पानी भरा देखा जाता है क्या गर्मी क्या सर्दी इस कुंड की विशेषता है कि इसका पानी एक जैसा बना रहता है। मंदिर की कुछ दूरी पर ही तालाब बना हुआ है।

भीषण गर्मी में कई बार तालाब का पानी सूखते देखा गया पर देवी कुंड का पानी कभी सूखते नहीं देखा गया है। इसी के चलते अक्षरा देवी का मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां दूर-दूर से भक्त मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं और अपनी मनौतिया मांगते हैं। लोगों का मानना है कि देवी माता से जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से मनौती मांगते हैं वह अवश्य पूरी होती है।

पंचमी पर गांव में सजाई गई झांकी

कुठौद। शारदीय नवरात्र पंचमी तिथि को विशेष महत्व नवरात्र में माना जाता है। इस दिन लोग मां स्कंदमाता की पूजा करते हैं। ब्लाक के जहटौली गांव में हनुमान मंदिर के दुर्गा मंदिर में भक्तों द्वारा फूलों से भव्य झांकी सजाई गई। भक्तों द्वारा नव रूपो में नन्ही कन्यायों को सजाया गया। साथ ही रामदरबार बालकों को राम, लक्षण व सीता और हनुमान बनाया गया। लोगों ने मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना कर झांकी के दर्शन किए। इसके बाद महंत बीरपाल दास व भगवान सिंह ने प्रसाद वितरण किया इस दौरान दीपांशु, आदित्य, बेटू, विकास, अभिषेक, नीरज आदि मौजूद रहे। (संवाद)



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