उरई। पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले विजय दिवस समारोह का आयोजन माहिल तालाब पर बने शहीद स्थल पर किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय चौधरी ने कारगिल युद्ध में शहीद हुए योगेंद्र पाल की मां, गलवान घाटी में चीन सीमा पर शहीद हुए हवलदार धर्मपाल सिंह राजपूत की पत्नी, जम्मू और कश्मीर में शहीद हुए शहीद अवध बिहारी सिंह की पत्नी और 1965 में कश्मीर में शहीद हुए अब्दुल रहमान के परिजनों को सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि सैनिकों की अदम्य साहस के कारण ही हम सभी सुरक्षित हैं। समाजसेवी लक्ष्मणदास बाबानी ने कहा कि हम सभी देशवासियों को भारतीय सेना पर गर्व है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कैप्टन अखिलेश नगायच ने कहा कि 13 दिन तक चले 1971 के युद्ध में आज ही के दिन पाकिस्तान की सेना के 93,000 सैनिकों ने जनरल नियाजी के साथ में भारतीय सेना के सामने घुटने टेक दिए थे और आज ही के दिन बांग्लादेश का उदय हुआ। इस दौरान डॉ. ममता स्वर्णकार, अलीम, पर्वत सिंह बादल आदि मौजूद रहे।

उधर कुठौंद संवाद के अनुसार, ग्राम हदरूख में स्थापित शहीद स्मारक में पूर्व सैनिक परिषद के तत्वावधान में विजय दिवस मनाया गया। 1971 में युद्ध की याद में मनाए जाने वाले विजय दिवस पर शहीद सैनिकों की पत्नियों का सम्मान किया गया। अध्यक्षता कर रहे कर्नल यशवंत सिंह ने कहा कि मौका आने पर देश के लिए अपनी जान के सर्वोच्च बलिदान से पीछे न हटने का मिशन हर फौजी अपने दिल में संजोए रहता है।

कहा कि समाज की मुख्य धारा में लौटने वाले पूर्व सैनिकों को बच्चे बच्चे में देशभक्ति की अलग जगाने के लिए समर्पित होना चाहिए। संचालन महेंद्र पाटकार ने किया। इस दौरान पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर, लेफ्टिनेंट कर्नल एनके मल्होत्रा, कैप्टन मास्टर सिंह, आशाराम दोहरे, महेंद्र सिंह, रामफल, जयदेव यादव, रूपराम आदि मौजूद रहे।



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