आटा। लाखों रुपये खर्च के बाद भी गांवों में बने सामुदायिक शौचालय सालों से बंद पड़े थे। इसके चलते ग्रामीण खुले में शौच जाने पर मजबूर थे।
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आटा। लाखों रुपये खर्च के बाद भी गांवों में बने सामुदायिक शौचालय सालों से बंद पड़े थे। इसके चलते ग्रामीण खुले में शौच जाने पर मजबूर थे।
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