
Jalaun परिवहन आयुक्त ,उ०प्र० द्वारा समस्त विद्यालयों हेतु अपने पत्र 23 जुलाई द्वारा एक सर्कुलर जारी करते हुए
ByParvat Singh Badal (Bureau Chief Jalaun)✍️
Jul 31, 2025 #A congtract carriage permit (SR-21A) is mandatory as per Section 73 of the Motor Vehicles Act.
पर्वत सिंह बादल उरई ( ब्यूरो चीफ जालौन) ✍️ (उरईजालौन ) उरई: जनपद सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी(प्रशा०/प्रर्व०) सुरेश कुमार ने बताया कि जनपद के समस्त सम्मानित विद्यालय संचालकों/प्रबन्धकों/प्रधानाचार्यों को सूचित किया जाता है कि परिवहन आयुक्त , उत्तर प्रदेश द्वारा समस्त विद्यालयों हेतु अपने पत्र दिनाँक 23 जुलाई 2025 द्वारा एक सर्कुलर जारी करते हुए निम्नलिखित निर्देश निर्गत किए गयें हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली (छब्बीसवाँ संशोधन), 2019 का स्पष्ट कानूनी प्रावधान- विद्यालय की अपनी बस के संचालन हेतु मोटर वाहन अधिनियम की धारा-76 के अन्तर्गत निजी सेवा यान परमिट (SR-23क) आवश्यक है। निजी बस (ठेका गाड़ी) के संचालन हेतु विद्यालय प्रशासन और वाहन स्वामी के बीच लिखित करार अनिवार्य है। परमिट हेतु मोटर वाहन अधिनियम की धारा-73 के अन्तर्गत congtract carriage permit (SR-21क) अनिवार्य है। विद्यालय वैन (13 सीट तक) के संचालन हेतु वाहन स्वामी तथा अभिभावकों के बीच लिखित करार तथा विद्यालय प्रशासन द्वारा अग्रसारित परमिट आवेदन (SR-21बी) आवश्यक है।
इस व्यवस्था का पालन न करना कानूनी रुप से अपराध की श्रेणी में आता है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय प्रबन्धन की स्पष्ट कानूनी एवम् प्रशासनिक जिम्मेदारी- विद्यालय परिसर से नियमित रुप से विद्यार्थियों के परिवहन हेतु संचालित प्रत्येक वाहन (बस/वैन आदि) की सम्पूर्ण जिम्मेदारी विद्यालय प्रबन्धन (प्रबन्धक/प्रधानाचार्य) की है। विद्यालय परिसर से संचालन करने वाले किसी भी वाहन के सम्बन्ध में विद्यालय प्रबन्धन किसी भी परिस्थिति में यह कहकर उत्तरदायित्व से बच नहीं सकता कि ‘‘यह वाहन विद्यालय का नहीं है।’’
विद्यालय परिसर में संचालित वाहन की फिटनेस, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, चालक एवम् परिचालक का पुलिस सत्यापन, स्वास्थ्य परीक्षण, प्रशिक्षण तथा वाहन से जुड़ी अन्य विधिक एवम् प्रशासनिक जिम्मेदारी स्पष्ट रुप से विद्यालय प्रबन्धन की ही है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय वाहनों के सम्बन्ध में विद्यालय प्रबन्धन से अपेक्षित तत्काल एवम् प्रभावी कार्यवाही हेतु निर्देश- समस्त विद्यालयों के प्रबन्धकों एवम् प्रधानाचार्यों को सूचित किया जाता है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988, केन्द्रीय मोटरयान नियमावली, 1989, AIS-063, AIS-125 तथा उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली (छब्बीसवाँ संशोधन), 2019 के अनुसार विद्यालय वाहनों के संचालन हेतु निम्नलिखित तत्काल एवम् प्रभावी कार्यवाही अनिवार्यतः अपेक्षित है। वाहनों के दस्तावेजों की नियमित जाँच एवम् अद्यतन सुनिश्चित करें- अपने विद्यालय से सम्बद्ध सभी वाहनों (स्कूलबस/निजी ठेका गाड़ी/वैन) के निम्नलिखित दस्तावेजों की नियमित जाँच एवम् रिकाॅर्ड का रख-रखाव विद्यालय स्तर पर अनिवार्यतः करें- वैध परमिट (SR-23क/SR-21क/SR-21बी), फिटनेस प्रमाण पत्र (वाहनों की आयु सीमा के अनुसार), बीमा प्रमाण पत्र, प्रदूषण नियंत्राण प्रमाण पत्र (PUCC),ड्राइवर का विधिमान्य ड्राइविंग लाइसेंस।
यदि कोई भी वाहन निर्धारित दस्तावेजों के अभाव में पाया जाता है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी विद्यालय प्रबन्धन की होगी और कठोर कार्यवाही होगी। अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था तत्काल करें- अपने विद्यालय से सम्बद्ध वाहनों में निम्नलिखित सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करें तथा उनका नियमित निरीक्षण करें- GPS लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, CCTV कैमरा सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट-एड बाॅक्स (प्राथमिक उपचार किट), आपातकालीन द्वार एवम् खिड़की (इमरजेंसी द्वार), प्रत्येक सीट में सीट बेल्ट की व्यवस्था।
इन उपकरणों की अनुपस्थिति दुघर्टना या आपात स्थिति में गम्भीर परिणाम दे सकते हैं।
चालक एवम् परिचालक के पुलिस सत्यापन/प्रशिक्षण एवम् स्वास्थ्य जाँच की व्यवस्था करें- आपके विद्यालय के वाहन चालकों एवम् परिचालकों का पुलिस सत्यापन/नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा वाहन संचालन का उचित प्रशिक्षण देना अनिवार्य है। विद्यालय वाहन में बालिका विद्यार्थी होने की स्थिति में महिला परिचालक की व्यवस्था अनिवार्य करें।
विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति (Rule 222 छ) तत्काल गठित एवं नियमित करें- अपने विद्यालय स्तर पर विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति तत्काल गठित करें। समिति की नियमित मासिक बैठक करें। वाहन संचालन एवम् सुरक्षा व्यवस्था के सम्बन्ध में समिति की प्रत्येक बैठक का रिकॉर्ड रखें। समिति द्वारा लिए गए निर्णयों का कठोरता से पालन सुनिश्चित करें।
निजी पंजीकृत वाहनों का औपचारिक रूप से सम्बद्धीकरण करें- जो निजी पंजीकृत वाहन नियमित आपके विद्यालय के विद्यार्थियों को विद्यालय लाते हैं, उनका औपचारिक रूप से लिखित करार के माध्यम से सम्बद्धीकरण करें तथा विधिवत परमिट (SR-21बी) हेतु वाहन स्वामी के आवेदन को विद्यालय प्रशासन द्वारा अग्रसारित करें। निजी वाहनों के गैर-कानूनी संचालन की स्थिति में विद्यालय प्रबन्धन सीधे जिम्मेदार होगा।
विद्यालय प्रबन्धकों एवम् प्रधानाचार्यों की स्पष्ट कानूनी जिम्मेदारी तथा व्यक्तिगत उत्तरदायित्व की गंभीर चेतावनी- सभी विद्यालय प्रबन्धक एवम् प्रधानाचार्य कृपया ध्यान दें कि विद्यालय से सम्बद्ध सभी वाहनों का संचालन एवम् सुरक्षा के मानों का पालन विद्यालय प्रबन्धन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। यदि आपके विद्यालय से सम्बद्ध किसी वाहन के संचालन के दौरान, आपकी लापरवाही, नियमों की अवहेलना या उक्त निर्देशों के अनुपालन में विफलता के कारण कोई दुर्घटनाऐं आपराधिक घटना अथवा अन्य अप्रिय घटना घटित होती है, तो ऐसे मामलों में विद्यालय प्रबन्धन, प्रधानाचार्य तथा प्रबन्धक के विरुद्ध व्यक्तिगत तौर पर आपराधिक, कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
सभी विद्यालयों को यह चेतावनी भी दी जाती है कि किसी भी दुर्घटना या आपराधिक घटना के बाद यदि यह प्रमाणित होता है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा उक्त घटना से बचने हेतु आवश्यक प्रबंध नहीं किये गए थे या आपकी ओर से किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई थीए तो ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई के अंतर्गत आपराधिक उत्तरदायित्व एवम् दण्डात्मक कार्यवाही हेतु परिवहन विभाग कार्य करेगा। उक्त स्थिति में विद्यालय की मान्यता का निरस्तीकरण हेतु भी लिखा जाएगा।
तत्काल पालन हेतु निर्देश- वाहनों के वैध दस्तावेजों (परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र) सुनिश्चित करें, सुरक्षा उपकरणों (GPS, CCTV, फायर एग्जिटिंग्वशर, फर्स्ट-एड) की व्यवस्था तत्काल करें, चालक व परिचालक का पुलिस सत्यापन, स्वास्थ्य जाँच व प्रशिक्षण सुनिश्चित करें, विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन कर नियमित बैठक करें, निजी वाहनों का औपचारिक रुप से परमिट द्वारा सम्बद्धीकरण करें, वाहन संचालन की समस्त जिम्मेदारी विद्यालय प्रबन्धन की होगी।
उक्त निर्देशों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट प्रत्येक विद्यालय प्रत्येक माह उप सम्भागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय, उरई (जालौन) में अनिवार्यतः प्रस्तुत करें। सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी द्वारा इसकी मासिक समीक्षा की जाएगी और पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी।
उपरोक्त के क्रम में स्पष्ट किया जाता है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से सम्बन्धित विषय में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अवहेलना कदापि स्वीकार नहीं की जाएगी। विद्यार्थियों की सुरक्षा विभाग एवम् सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस सम्बन्ध में नियमों का कठोर अनुपालन जनपद के समस्त विद्यालयों संचालकों/प्रबन्धकों/प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।
उक्त सर्कुलर को चेतावनी एवम् विधिक नोटिस के रुप में समझा जाए। इसके अनुपालन में किसी भी विफलता, लापरवाही, दुघर्टना या आपराधिक घटना की स्थिति में विद्यालय प्रबन्धन एवम् प्रधानाचार्य की व्यक्तिगत जवाबदेही तय होगी।
आशा है कि जनपद के समस्त विद्यालयों के संचालक/प्रबन्धक/प्रधानाचार्य इस गम्भीर विषय को अत्यन्त संवेदनशीलता एवम् जिम्मेदारी के साथ लेंगे तथा पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें।परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा 23 जुलाई 2025 को जारी एक परिपत्र (सर्कुलर) के माध्यम से विद्यालयों के लिए कुछ निर्देश जारी किए गए हैं। ये निर्देश संभवतः छात्रों की सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से हैं।
परिपत्र में दिए गए निर्देशों का विवरण इस प्रकार है:
1. स्कूल बसों की नियमित जांच:
सभी स्कूल बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की जाएगी।
2. चालक-परिचालकों का प्रशिक्षण:
स्कूल बस चालकों और परिचालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें यातायात नियमों और प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान शामिल होगा।
3. सुरक्षा उपकरण:
बसों में सुरक्षा उपकरण जैसे फर्स्ट-एड किट, अग्निशामक यंत्र आदि का होना अनिवार्य होगा।
4. सीट बेल्ट:
छात्रों के लिए सीट बेल्ट का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा।
5. गति सीमा:
स्कूल बसों के लिए गति सीमा निर्धारित की जाएगी और उसका सख्ती से पालन किया जाएगा।
6. अभिभावकों को सूचना:
स्कूल बसों के समय और मार्ग की जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी।
7. ओवरलोडिंग पर रोक:
स्कूल बसों में ओवरलोडिंग पर सख्त रोक लगाई जाएगी।
8. सुरक्षित स्टॉप:
स्कूल बसों के लिए सुरक्षित स्टॉप निर्धारित किए जाएंगे।
यह परिपत्र छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए जारी किया गया है।