
पर्वत सिंह बादल उरई जालौन ✍🏻
(उरईजालौन) उरई: जनपद नोडल(वेब पोर्टल) जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद भारतदीप ने बताया कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) अधिनियम-2019 के अंतर्गत राज्य में भूमिगत जल संरक्षित, नियंत्रित करने एवं भूमिगत जल का सतत् प्रबन्धन सुनिश्चित करने के लिये उसे दोनों परिमाणात्मक और गुणात्मक स्थायित्व प्रदान करने के लिये विशेष रूप से भूजल संकटग्रस्त ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भूजल संरक्षण एवं सवर्धन पर जोर दिया गया एवं सभी औद्योगिक, वाणिज्यक, अवसंरचनात्मक, आर०ओ० प्लांट और सामूहिक उपयोगकर्ताओं को भूजल निष्कर्षण हेतु अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एन.ओ.सी.) / पंजीकरण का प्राविधान किया गया है इसके अतिरिक्त भूजल कूप निर्माण की समस्त ड्रिलींग संस्थाओं का पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है।
अतः समस्त औद्योगिक, वाणिज्यिक, अवसंरचनात्मक, और सामूहिक उपयोगकर्ताओं अधिष्ठान यथा होटलों/लॉजों/आवासीय कालोनियों/रिर्जाटों/निजी चिकित्सालयों/परिचार्या गृहों / कारोबार क्षेत्रों/मॉल्स/वाटर पार्क एवं खेल परिसरों, स्टेडियमों इत्यादि सहित वर्तमान प्रस्तावित भूजल उपयोगकर्ताओं को आदेशित किया जाता है कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल अधिनियम-2019 की धारा-39 के अन्तर्गत बिना पंजीकरण/अनापत्ति प्रमाण-पत्र के भूगर्भ जल दोहन करने हेतु दोषी पाये गये व्यक्ति / समूह/संस्था को 02 से 05 लाख रूपये तक जुर्माना अथवा 06 माह से 01 वर्ष तक का कारावास अथवा दोनों निर्धारित किये गये है।
अतः उपरोक्त श्रेणी के उपयोक्ता तत्काल भूगर्भ जल विभाग के वेब पोर्टल http:upgwdonline.in पर आनलाइन आवेदन कर पंजीकरण/अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करें, इसके अतिरिक्त आवेदन से सम्बन्धित किसी भी अन्य जानकारी के लिए नोडल (वेब पोर्टल), जिला भूगर्भ जल प्रबन्धन परिषद, जनपद-जालौन से सम्पर्क कर सकते है। यदि किसी व्यक्ति/फर्म/संस्था द्वारा उपरोक्तानुसार भूगर्भ जल निष्कर्षण हेतु अनापत्ति प्रमाण-पत्र / रजिस्ट्रेशन का आवेदन नोटिस जारी होने की तिथि के एक सप्ताह के अन्दर नहीं किया जाता है तो उसके उपरान्त अवैध रूप से भूगर्भ जल निष्कर्षण किये जाने हेतु उसके विरूद्ध राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) अधिनियम-2019 में पारित आदेशों के क्रम में दंडात्मक कार्यवाही की जायेगी।