करीब दो महीने पहले प्रेमी को आत्महत्या के लिए उकसाने वाली प्रेमिका की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति-जनजाति निवारण निवारण अधिनियम) आदित्य चतुर्वेदी की अदालत ने निरस्त कर दी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक सौम्या साहू और तुषार पाखरे के बीच पिछले सात साल से प्रेम संबंध था। शुरुआती वर्षों में तुषार मंडी में काम कर अच्छी आमदनी कर लेता था, इसलिए उसके साथ संबंध बनाए रखी, लेकिन बाद में उसका काम छूट गया। उसके पास पैसों की कमी हो गई तो सौम्या ने किनारा करना शुरू कर दिया। दो फरवरी को सौम्या, तुषार के घर पर थी तभी उसने तुषार को गालियां दी व शादी करने से इनकार कर दिया था। इस दौरान उनके बीच नोकझोंक भी हुई और तुषार ने सौम्या के दुपट्टे का फंदा बनाया और झूल गया। उसे अस्पताल भेजा गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
कोतवाली पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था। सोमवार को विशेष न्यायालय में अभियुक्ता की ओर से जमानत अर्जी लगाई गई। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वह निर्दोष है, उसे फंसाया जा रहा है। विशेष लोक अभियोजक केशवेंद्र प्रताप सिंह और कपिल करौलिया ने दलील दी कि अभियुक्त ने उसे पैसे के लिए प्रताड़ित किया था, साथ ही शादी से इनकार कर दिया था, इसलिए तुषार ने फंदा लगाया। न्यायालय ने अभियुक्त की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
