वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन कोषागार से करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान विभिन्न विभागों को किया गया। इसमें सबसे अधिक 21 करोड़ रुपये नियोजन विभाग की ओर से ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) को दिए गए। भुगतान का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और कोषागार में कामकाज रात 12 बजे तक जारी रहा।
सरकारी अवकाश होने के बावजूद मंगलवार को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन कोषागार खुला रहा। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय पहुंच गए थे। दिनभर लंबित बिलों के भुगतान की प्रक्रिया चलती रही। अचानक बढ़े भुगतान के दबाव से विभागों में हलचल रही और अधिकारी-कर्मचारी देर रात तक जुटे रहे। बताया गया कि बजट लैप्स होने से बचाने के लिए विभागों ने तेजी दिखाते हुए अपने बिल कोषागार में प्रस्तुत किए, जिससे सुबह से ही फाइलों का दबाव बढ़ गया।
आरईएस को 21 करोड़ व एनजीटी को मिले 8 करोड़
मुख्य कोषाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि बुंदेलखंड में सड़कों के निर्माण के लिए सबसे अधिक 21 करोड़ रुपये नियोजन विभाग की ओर से आरईएस को दिए गए। इसके अलावा सिंचाई विभाग ने एनजीटी को आठ करोड़ रुपये का भुगतान किया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने निर्माण कार्यों के लिए आवास विकास को पांच करोड़ रुपये दिए।
पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग को मिले चार करोड़
वहीं, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग को मिलाकर शासन से करीब चार करोड़ रुपये मिले। मेडिकल कॉलेज ने यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को साढ़े तीन करोड़ और सीएंडडीएस को तीन करोड़ रुपये दिए। कृषि विभाग ने आधुनिकीकरण के लिए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को ढाई करोड़ रुपये दिए, जबकि मेडिकल कॉलेज ने नेशनल मेडिकल काउंसिल को 50 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और वन विभाग समेत अन्य विभागों में भी करीब साढ़े सात करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
आखिरी महीने में डेढ़ हजार करोड़ का भुगतान
कोषागार से वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में ही करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसमें एक हजार करोड़ रुपये केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत राजस्व विभाग को दिए गए।
