केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत अंग्रेजों के जमाने में बने पारीछा बांध की क्षमता बढ़ाने को केंद्रीय जल आयोग ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत बांध को मौजूदा जलस्तर से 1.80 मीटर अधिक ऊंचाई तक भरा जा सकेगा। इससे लगभग 20 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा, जिससे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई के लिए राहत मिल सकेगी।
झांसी मंडल का सबसे पुराना पारीछा बांध वर्ष 1875 में बनकर तैयार हुआ था। सिंचाई विभाग के अनुसार तकनीकी रूप से यह बांध आज भी मजबूत है, लेकिन सौ साल से अधिक समय बीतने के कारण इसमें काफी मात्रा में गाद जमा हो गई है। इससे इसकी जल भंडारण क्षमता लगातार घटती जा रही है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के जरिये अब इसकी क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय जल आयोग ने बांध को इस परियोजना में शामिल किए जाने को हरी झंडी दे दी है। क्षमता बढ़ाने के लिए बांध के पुराने गेट बदले जाएंगे और नए स्लूज बनाए जाएंगे। वर्तमान में बांध में 318 गेट लगे हैं, जो अंग्रेजों के समय के हैं। इनकी जगह नए गेट लगाए जाएंगे, हालांकि उनकी डिजाइन अभी तय नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार इस योजना के बाद पारीछा बांध को 196.05 मीटर तक भरा जा सकेगा, जबकि अभी यह 194.65 मीटर तक ही भर पाता है। इससे करीब 20 एमसीएम अतिरिक्त पानी मिलेगा और बांध में कुल करीब 86 एमसीएम पानी तक भंडारण संभव हो सकेगा।
सपरार और लहचूरा बांध भी होंगे लाभान्वित
इस परियोजना के जरिये सपरार और लहचूरा बांध को भी जोड़ा जाएगा। ये दोनों बांध अक्सर पूरे नहीं भर पाते हैं। इनके भरने से मऊरानीपुर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। कार्यों के स्वरूप और प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए जल्द ही अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी।
यह कहते हैं अधिकारी
पारीछा बांध की क्षमता बढ़ाने का कार्य कराया जाएगा। इसके साथ ही अन्य जलाशयों को भी इस परियोजना से जोड़ा जाएगा। – देवेश शुक्ला, मुख्य अभियंता (केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट)
