कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज थेरेपी की शुरुआत कर दी है। इस अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति से एक महीने के अंदर करीब 100 कैंसर रोगियों का सटीक और प्रभावी उपचार किया गया है। इसी अवधि में इस पद्धति से न्यूरो के भी 20 मरीजों का सफल इलाज किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह थैरेपी कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें निशाना बनाती है, जिससे इलाज ज्यादा असरदार और सुरक्षित होता है।

कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि कैंसर रोगियों को कीमोथेरेपी दी जाती है जिसके बाद रेडियोथैरेपी के लिए बाहर भेज दिया जाता था। मगर अब कैंसर रोगियों को कीमोथेरेपी के साथ मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज की डोज दी जा रही है। इससे मरीज के शरीर में कैंसर के खिलाफ न सिर्फ एंटीबॉडीज पैदा होती है बल्कि कैंसर की सेल बनने की रफ्तार भी काफी कम हो जाती है और उसके ठीक होने की उम्मीद बढ़ जाती है।

गरीब और मध्यम वर्ग को मिलेगी राहत

चिकित्सकों ने बताया कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज उपचार को टारगेटेड थेरेपी कहा जाता है। इसका उपचार महंगा होता है लेकिन इसमें दवाएं केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर असर करती हैं, जबकि सामान्य कोशिकाएं काफी हद तक सुरक्षित रहती हैं। अब तक इस तरह के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों या महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ता था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में सुविधा शुरू होने से क्षेत्र के गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत मिली है।

ऑटोइम्युन बीमारियाें के उपचार में भी मददगार

न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कनकने ने बताया कि दिमाग और रीढ़ की हड्डी से संबंधित कई ऑटोइम्युन बीमारियां होती हैं, जिनमें प्रमुख रूप से हाथ-पैर का कमजोर होना, आंख की रोशनी तेजी से कम होना, सोचने-समझने की शक्ति का तेजी से क्षीण होना आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विभाग में करीब 15 दिन से 20 रोगियों को मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज की डोज देना शुरू किया है जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. पारस गुप्ता ने बताया कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज डोज देने से रूमेटिक आर्थराइटिस के रोगियों को भी काफी राहत मिली है।



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