सिमरावारी गांव में घुरारी नदी के जलग्रहण क्षेत्र पर कब्जा होने की शिकायत पर राजस्व, खनन और वन विभाग की टीम जांच करने पहुंची। यहां प्लॉटिंग से संबंधित काम को रुकवा दिया। राजस्व अभिलेखों में दर्ज नदी की भूमि पूरी मिली। अब एसडीएम सदर ने निजी काश्तकार की जमीन की पैमाइश के आदेश दिए हैं।

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घुरारी नदी के क्षेत्र में अतिक्रमण, मुख्य प्रवाह के पास कुछ लोगों द्वारा 300 मीटर से अधिक लंबाई में प्लॉटिंग करने की शिकायत आईजीआरएस पर परमार्थ संस्था की जल सहेली अंतिम झा ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नदी किनारे 10 से 15 फीट भीतर तक अतिक्रमण कर लिया गया है। मुख्य धारा के बिल्कुल किनारे दीवार बना दी गई है। अमर उजाला ने इस खबर को 10 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद एसडीएम सदर गोपेश तिवारी मौके पर पहुंचे। लेखपाल जितेंद्र कुमार ने नदी की भूमि की पैमाइश शुरू की। दक्षिण-पश्चिम दिशा में 60 मीटर अथवा 198 फीट और दक्षिण-पूर्व दिशा में 95 मीटर अथवा 300 फीट नदी की चौड़ाई मिली।

एसडीएम ने बताया कि राजस्व अभिलेखों में जितनी भूमि नदी के नाम पर दर्ज है, उतनी मौके पर पाई गई है। जल सहेलियों ने शिकायत की है कि निजी काश्तकार भी अपनी भूमि से अधिक क्षेत्र में प्लॉटिंग कर रहे हैं। लेखपाल को जांच के आदेश दे दिए गए हैं। बताया गया कि काश्तकार से भी कहा गया है कि हदबंदी डालें। यह प्रक्रिया पूरी होने पर ही काम शुरू करें।



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