जल जीवन मिशन का अधूरा काम पूरा कराने में जल निगम (ग्रामीण) अफसर बुरी तरह हांफ गए हैं। जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के अल्टीमेटम देने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम रफ्तार नहीं पकड़ सका। मंत्री स्वतंत्र देव ने काम में दिलचस्पी न लेने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की बात कही थी लेकिन, स्थानीय जल निगम अफसर इसके लिए राजी नहीं हैं। वे उन कंपनियों से ही काम कराने पर अड़े हैं। जिस रफ्तार से ये कंपनियां काम कर रही हैं, उसके मुताबिक अगले साल चुनाव से पहले तक सभी गांव तक पानी की आपूर्ति संभव नहीं है।

जल निगम (ग्रामीण) अफसरों की लापरवाही से यह योजना सरकार के गले की फांस बन चुकी है। लेटलतीफी और बेहद सुस्त रफ्तार से काम होने से समय पर योजना पूरी नहीं हो सकी। नतीजतन केंद्र सरकार ने बजट देने से मना कर दिया। योजना का काम ठप पड़ गया। पाइप लाइन बिछाने के लिए जिन सड़कों को खोदा गया था, उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। इसके अलावा गांव के लोगों तक पानी भी नहीं पहुंचा। अब भी इमलौटा, बरथरी व टेहरका में काम अधूरा है। कहीं टेस्टिंग नहीं हो पा रही, तो कहीं जल संयोजन अधूरा है। कई जगह पाइप लाइन का काम भी पूरा नहीं हुआ। अब तक सिर्फ 385 गांव तक ही पानी पहुंच सका जबकि 228 गांव के लोग पानी का इंतजार कर रहे हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता रणविजय सिंह ने इस बारे में मंत्री से ही पूछने की बात कहते हुए आगे बात करने से इन्कार कर दिया।

40 फीसदी काम अधूरा

केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने करीब 1,465 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना की मदद से 613 गांव के 2.09 लाख घरों तक पानी पहुंंचाने की योजना शुरू की थी लेकिन, अब तक 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका, जबकि 40 फीसदी काम अधूरा है। जल निगम अभियंताओं का कहना है कि दस जल परियोजनाओं में गुलारा, बचावली, तिलैथा, बुढ़पुरा, कुरैचा, पुरवा व बढ़वार से पानी पहुंचाया जा रहा। तीन जल परियोजनाएं अधूरी हैं।

कई मजरों में अब तक नहीं बिछी पाइप लाइन

मऊरानीपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत घाटकोटर में जल जीवन मिशन के तहत काम अधूरा पड़ा है। यहां शंकरगढ़, रामगढ़ और कुशनगर समेत कई मजरों में अब तक पाइप लाइन नहीं बिछाई गई जबकि प्लांट से 32 गांवों को पानी देने की योजना है। अभी 18 गांवों में ही कार्य पूर्ण हो पाया है। शेष 14 गांवों में कहीं टोंटियां नहीं लगी हैं तो कहीं सड़क उखड़ी पड़ी है। ग्राम पंचायत तिलैरा में मुख्य टैक्सी स्टैंड, आदिवासी बस्ती, मड़वा मार्ग की आबादी तक पाइपलाइन नहीं डाली गई है।

पानी पहुंचा नहीं और सड़कें भी बदहाल

बामौर ब्लॉक के अधिकांश गांवों में स्थिति बेहद खराब है। कहीं पानी नहीं आ रहा तो कहीं पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कें मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। ब्लाॅक मुख्यालय की ग्राम पंचायत बामौर की 50 प्रतिशत सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। जिन सड़कों की मरम्मत हुई है, उनमें से ज्यादातर की ग्राम पंचायत ने अपने मद से मरम्मत कराई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिशासी अभियंता से शिकायत की गई। उनकी ओर से भी सुनवाई नहीं हुई। ग्राम पंचायत फरीदा के मडपुरा, छिरौरा व अजनेरी में भी जलापूर्ति नहीं हो रही है। वहीं, ग्राम पंचायत दखनेश्वर की प्रधान रामलली के मुताबिक उनके गांव में पानी की आपूर्ति और सड़कों की मरम्मत दोनों की स्थिति बदहाल है। भदरवारा बुजुर्ग, देवरा बुजुर्ग में लगभग 80 प्रतिशत मार्गों की मरम्मत का इंतजार है। पानी भी 50 प्रतिशत आबादी को ही मिल पा रहा है। ग्राम पंचायत हरदुआ और ग्राम पंचायत नागर में भी हर घर नल योजना का हाल खराब है।

कागजों में दौड़ रही हर घर नल योजना

विकासखंड गुरसराय की ग्राम पंचायत पंडवाहा में हर घर नल योजना की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। योजना के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों को खोदा गया था, लेकिन कई स्थानों पर बिना पाइप डाले ही मिट्टी भरकर बंद कर दिया गया। कहीं पाइपलाइन डाली भी गई तो घरों के बाहर नल नहीं लगाए गए, और नल लगाने के लिए निकले पाइप भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में ग्रामीणों को इस गर्मी के सीजन में स्वच्छ पानी मिलना असंभव लग रहा है। मऊरानीपुर-गुरसराय मुख्य सड़क से राकेश पटेल के मकान तक और मातादीन अहिरवार के मकान वाले रास्ते में सड़क तो खोदी गई, लेकिन अब तक पाइपलाइन नहीं डाली गई। ग्राम पंचायत बगरौनी में भी पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन कुछ ही घरों में नल लगाए गए हैं। उनमें भी पानी नहीं आ रहा है।



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