दो साल पहले 10 वर्ष की बालिका को घर बुलाकर दुष्कर्म करने वाले को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नेयाज अहमद अंसारी की अदालत ने 20 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 31 जनवरी 2024 को मोंठ थाने के एक गांव की रहने वाली महिला ने पुलिस को तहरीर दी कि उसकी 10 वर्षीय बेटी घर पर अकेली थी। जब वह शाम को मजदूरी कर घर लौटी तो बेटी ने रोते हुए बताया कि पड़ोस में रहने वाले प्रदीप उर्फ लला खरे (28) ने उससे दुष्कर्म किया। उसने यह भी बताया कि 15 दिन पहले भी प्रदीप ने उसे घर बुलाया था और दुष्कर्म किया था। साथ ही धमकी दी थी कि अगर किसी को बताया तो मां व पिता को मार डालेगा। इस डर से वह चुप थी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। 16 अगस्त 2024 को न्यायालय में आरोप तय किया गया था। प्रदीप को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था। यहां से उसे जेल भेज दिया गया था। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को दी जाए ताकि वह पुनर्वास कर सके।
दोषी के अधिवक्ता ने कहा- क्षमा किया जाए
दोषी के अधिवक्ता ने न्यायालय में तर्क दिया कि प्रदीप पर यह पहला अपराध है। उसे क्षमा किया जाए लेकिन विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) विजय सिंह कुशवाहा ने तर्क दिया कि दोषी का कृत्य क्षमा योग्य नहीं है। उसे कड़ी सजा दी जाए। न्यायालय ने दोषी को उक्त सजा सुनाई।