नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में बुधवार को मेयर और नगर आयुक्त के बीच प्रस्तावों की जांच को लेकर टकराव देखने को मिला। बैठक में पार्किंग, अतिक्रमण समेत कई मुद्दों पर पार्षदों ने भी अधिकारियों को घेरा। बैठक में मेयर बिहारी लाल आर्य ने कहा कि पिछले साढ़े चार महीने से कोई वर्कऑर्डर जारी नहीं हुआ है। प्रस्तावों को बार-बार क्रॉस चेक कराने से काम में अनावश्यक देरी हो रही है। इस पर नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने कहा कि जांच कराने से ही गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।

उन्होंने स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 का उदाहरण देते हुए बताया कि 1.23 करोड़ रुपये के कार्य का भुगतान प्रस्तावित था, लेकिन जांच में काम महज 30 लाख रुपये का पाया गया। इसके बाद 28 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया। यदि जांच न होती तो यह गड़बड़ी सामने नहीं आती।

इसी दौरान नगर आयुक्त ने एक पार्षद के वार्ड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पहले से बनी सड़क का दोबारा प्रस्ताव बनाकर निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जिसे शिकायत मिलने पर निरस्त किया गया।

दोनों के बीच बहस बढ़ने पर कुछ पार्षदों ने हस्तक्षेप किया। मीडिया कर्मियों द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू करने के बाद स्थिति शांत हुई। इसके बाद मेयर ने कहा कि वह भी गुणवत्तापूर्ण कार्य के पक्षधर हैं, लेकिन निर्माण विभाग से आने वाले प्रस्तावों को समय पर स्वीकृति मिलनी चाहिए। यदि बाद में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाए। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावों की वास्तविकता जांचने के लिए अधिकारियों को मौके पर भेजा जाता है, जिससे यह तय हो सके कि कार्य की आवश्यकता है या नहीं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच प्रक्रिया जरूरी है।

डेढ़ घंटे देरी से शुरू हुई बैठक

कार्यकारिणी की बैठक तय समय से करीब डेढ़ घंटे देरी से दोपहर 1:30 बजे शुरू हुई। इससे पहले मेयर कक्ष में भाजपा के कार्यकारिणी सदस्यों के साथ करीब आधे घंटे तक मंथन किया गया, जिसके बाद बैठक शुरू हुई।



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