नगर निगम के कामों के टेंडर को ठेकेदारों की ओर से पूल बनाकर बेहद कम दर पर लेने की कोशिश का भंडाफोड़ हो गया। एक काम महज डेढ़ फीसदी कम दर पर उठने के बाद नगर आयुक्त ने जांच कराई तो दो फर्मों की बिड डालने के कंप्यूटर/लैपटॉप का आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस और तारीख एक मिली। एक अन्य टेंडर में भी यही स्थिति सामने आई। दर गोपनीयता भंग होने का कारण मनाते हुए दोनों कामों के टेंडर निरस्त कर दिए गए।
आईपी एड्रेस समान होने से फंसे
नगर निगम में 21 जनवरी को सात करोड़ के 12 कामों के टेंडर निकाले गए थे। निविदा डालने की अंतिम तिथि 17 फरवरी थी। इसमें वार्ड 33 पिछोर में लक्ष्मीपुरम कॉलोनी से एसटीपी प्लांट तक 66.55 लाख रुपये से आरसीसी नाला के निर्माण का भी टेंडर शामिल था। बताया गया कि इस काम के लिए पांच फर्मों ने निविदा डाली। तीन फर्में तकनीकी रूप से चयनित हो गईं। इसके बाद कामदगिरी कंस्ट्रक्शन का चयन एल-1 के रूप में हुआ। इस फर्म ने डेढ़ फीसदी कम दर पर टेंडर डाला था। इससे निगम के अफसरों को शक हुआ तो फिर से जांच कराई। जांच में सामने आया कि मेसर्स कृष्ण कुमार और रामदेवी कंस्ट्रक्शन की बिड एक ही तारीख पर एक ही कंप्यूटर/लैपटॉप से डाली गई है। यही स्थिति हनुमान जी बिल्डर, मेसर्स कामदगिरी कंस्ट्रक्शन की बिड में भी सामने आई। आईपी एड्रेस समान होने पर इसकी पुष्टि हुई। टेंडर डालने में समय का अंतर भी एक ही घंटे रहा।
जांच में सामने आया खेल
पूल बनाने का खेल सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने अन्य कार्यों के टेंडरों की भी जांच कराई। ऐसे में वार्ड 35 नंदनपुरा में 38.05 लाख रुपये से नाली, पुलिया और एपेक्स सड़क निर्माण के टेंडर में भी खेल सामने आ गया। बताया गया कि इस काम के लिए पांच फर्मों ने निविदा डाली थी, जिसमें मेसर्स सीएल पाठक, मेसर्स जय जय श्रीराम ट्रेडर्स, मेसर्स कृष्ण कुमार, मेसर्स संजय अग्रवाल और मेसर्स समृद्धि कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स शामिल हैं। तकनीकी बिड खोलने पर एक फर्म मेसर्स जय-जय श्रीराम ट्रेडर्स बाहर हो गई। अन्य फर्मों को लेकर परीक्षण कराया गया तो मेसर्स सीएल पाठक और मेसर्स संजय अग्रवाल की ओर से टेंडर डालने में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर/लैपटॉप का आईपी एड्रेस भी एक मिला। निविदा पूर्ण करने की तारीख एक और समय भी आसपास था।
जांच समिति की रिपोर्ट-दर गोपनीयता हुई भंग
नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने मामले की जांच पांच सदस्यीय निविदा समिति से कराई। समिति में शामिल मुख्य अभियंता राजवीर सिंह, मुख्य नगर लेखा परीक्षक नरेंद्र सिंह गर्खाल, अधिशासी अभियंता नीना सिंह, लेखाधिकारी डॉ. प्रतीक्षा गुप्ता, सहायक लेखाधिकारी राजकिशोर ने निविदा का मूल्यांकन किया। अपनी रिपोर्ट में कहा कि निविदा डालने का आईपी एड्रेस और तिथि समान होने पर दर गोपनीयता भंग हुई है और टेंडर पूल होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद वार्ड 33 और 35 की निविदाओं को निरस्त कर दिया गया।
इनका यह है कहना
दो निविदाओं में ठेकेदारों की ओर से पूल करने की कोशिश की गई। जांच में सामने आया कि वार्ड 33 और 35 के कामों में फर्मों की ओर से डाली बिड का आईपी एड्रेस एक ही है। तारीख समान होने के साथ ही बिड डालने का समय भी आसपास ही है। जांच समिति की रिपोर्ट में दर गोपनीयता भंग होने का जिक्र करने और पूल बनाने की आशंका जताने पर दोनों निविदाएं निरस्त कर दी गई हैं। इन कामों का फिर से टेंडर निकाला जा रहा है। – आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।
