नगर निगम की ओर से लिए जाने वाले नामांतरण शुल्क में पांच गुना की भारी-भरकम कमी होने जा रही है। इसके लिए झांसी नगर निगम निर्धारण सूची में संशोधन और परिवर्तन नाम से नई उपविधि बनाई गई है। नगर निगम सदन से पारित होने के बाद कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर इसे लागू कर दिया जाएगा। इस नई उपविधि के लागू होने से हर महीने दाखिल-खारिज कराने वाले सैकड़ों लोगों को फायदा होगा।
मौजूदा व्यवस्था में भवनों के नामांतरण के एवज में नगर निगम संपत्ति की कुल कीमत का एक प्रतिशत शुल्क जमा कराता है। ईडब्ल्यूएस भवन से लेकर बड़े मकान तक के लिए यह शुल्क एक समान है। अभी इस पैसे को जमा कराने के लिए उसके पास कोई निश्चित नियमावली नहीं थी। नगर निगम अपनी आंतरिक व्यवस्था के मुताबिक शुल्क वसूल रहा था। झांसी में वसूली जाने वाली एक प्रतिशत की राशि पूरे सूबे के नगर निगमों में सबसे अधिक थी। इस हिसाब से 15 लाख के भवन का नामांतरण कराने के लिए आवेदक को 15 हजार रुपये चुकाने पड़ते थे। नामांतरण के लिए आने वाले अधिकांश भवनों की माली हालत 15 लाख से अधिक रहती है। ऐसे में भवन स्वामियों को अतिरिक्त बोझ सहना पड़ता था।
नगर निगमों की इस मनमर्जी की शिकायत शासन स्तर पर पहुंची। जांच कराने पर यह विसंगति सही मिली। इसके बाद नगर निगम को नामांतरण शुल्क लेने के लिए नई नियमावली बनाने को कहा गया था। शासन के निर्देश के बाद भी अपनी आय को चपत लगने की आशंका के चलते नगर निगम प्रशासन महीनों से टालमटोल कर रहा था। शासन के निर्देश फाइल में दबे रहे। पिछले महीने नगर विकास विभाग ने इसके लिए समय सीमा तय कर दी। इसके बाद निगम अमला हरकत में आया। आनन-फानन में नई नियमावली बनाई गई।
नई नियमावली में नामांतरण के लिए शुल्क तय कर दिया गया है। इस आधार पर ही शुल्क लिया जाएगा। यह पहले के मुकाबले पांच गुना कम है। उदाहरण के तौर पर 15 लाख माली कीमत वाले भवन के नामांतरण के लिए जहां पहले भवन स्वामी को 15 हजार रुपये देने पड़ते थे। अब नई नियमावली लागू होने के बाद उसे महज 3 हजार रुपये देने पड़ेंगे। इससे भवन स्वामियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अवधेश कुमार का कहना है कि नई नियमावली बना ली गई है। इसे निगम सदन के सम्मुख रखा जाएगा।
लागू करने से पहले मांगी जाएंगी आपत्तियां
नगर निगम सदन में पेश होने के बाद इस नई नियमावली का सार्वजनिक प्रकाशन होगा। आम लोगों से आपत्तियां ली जाएंगी। इन आपत्तियों की सुनवाई की जाएगी। इसके बाद नई दरें अधिसूचित मान ली जाएंगी। उसके बाद नई दरों के मुताबिक नामांतरण शुल्क लिया जाएगा।
नगर निगम की आय को लगेगी चपत
नामांतरण से नगर निगम को सालाना करोड़ों रुपये की आय होती है लेकिन नई नियमावली से इसमें तगड़ी चपत लगेगी। इसी वजह से निगम प्रशासन यह नई नियमावली लागू करने में अभी तक टालमटोल कर रहा था। शासन स्तर से समय सीमा तय कर दिए जाने के बाद मजबूरन इसे लागू करने की कवायद शुरू करनी पड़ रही है।
रजिस्ट्रीकृत वसीयत के मामले में प्रभार की दरें
संपत्ति का क्षेत्रफल प्रभार की धनराशि
1000 वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 1000
1001-2000 वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 2000
2001-3000 वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 3000
3000 से अधिक वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 5000
बैनामा में संपत्ति मूल्य के आधार पर तय हुआ इतना शुल्क
संपत्ति का मूल्य प्रभार की धनराशि
5 लाख प्रभार की धनराशि 1000
5 लाख से 10 लाख प्रभार की धनराशि 2000
10-15 लाख प्रभार की धनराशि 3000
15-50 लाख प्रभार की धनराशि 5000
50 लाख से अधिक प्रभार की धनराशि 10,000
