भारी भरकम नामांतरण शुल्क चुकाने से भवन स्वामियों को जल्द राहत मिल सकेगी। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नगर निगम प्रशासन ने बुधवार से इसकी कवायद आरंभ की।
निगम ने प्रस्तावित उपविधि की सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करते हुए आपत्तियां आमंत्रित की हैं। तीस दिन तक आपत्तियां दाखिल होंगी। निस्तारण के बाद उपविधि सदन के सामने मंजूरी के लिए रखी जाएगी। छह माह में उपविधि के लागू हो जाने की उम्मीद जाहिर की गई है। नामांतरण शुल्क में कमी से दाखिल-खारिज कराने वाले लोगों को फायदा मिलेगा।
अभी भवनों के नामांतरण में नगर निगम संपत्ति की कुल कीमत का एक प्रतिशत शुल्क जमा कराता है लेकिन, इसकी कोई नियमावली नहीं है। इस हिसाब से 15 लाख रुपये कीमत के भवन का नामांतरण कराने के लिए भवन स्वामी को 15 हजार रुपये चुकाने पड़ते थे। आंतरिक व्यवस्था के मुताबिक शुल्क वसूली हो रही है। पूरे सूबे में झांसी में सबसे अधिक दर पर वसूली हो रही थी। शासन तक यह शिकायत पहुंची थी लेकिन, निगम प्रशासन नियमावली बनाने में टालमटोल करता रहा। दो माह पहले नगर विकास महकमे के कड़ाई करने पर निगम अफसरों को नियमावली बनाने पर मजबूर होना पड़ा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अवधेश कुमार का कहना है कि नियमावली लागू किए जाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई। इसी वित्तीय वर्ष में मंजूरी दिलाने की कोशिश रहेगी।
इन दरों को किया गया प्रस्तावित
रजिस्ट्रीकृत वसीयत के मामले में प्रभार की दरें
संपत्ति का क्षेत्रफल प्रभार की धनराशि
1000 वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 1000
1001-2000 वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 2000
2001-3000 वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 3000
3000 से अधिक वर्गफीट में प्रभार की धनराशि 5000
बैनामा में संपत्ति मूल्य के आधार पर तय हुआ इतना शुल्क
संपत्ति का मूल्य प्रभार की धनराशि
5 लाख प्रभार की धनराशि 1000
5 लाख से 10 लाख प्रभार की धनराशि 2000
10-15 लाख प्रभार की धनराशि 3000
15-50 लाख प्रभार की धनराशि 5000
50 लाख से अधिक प्रभार की धनराशि 10,000
