सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च करके बने प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद भी धूल फांक रहे हैं। बन जाने के बाद भी अफसरों की लापरवाही से यह तैयार होकर भी बेकार पड़े हैंं। चाहे वह जेडीए का बनाया कनवेंशन सेंटर एवं अरबन हाट हो या स्मार्ट सिटी मिशन से बना बुंदेलखंड कल्चरर सेंटर, पर्यटन केंद्र जैसे प्रोजेक्ट। वर्षों से इनके दरवाजे पर ताला लटक रहा है। इनके इस्तेमाल शुरू होने के सवाल का जवाब देने से अब अफसर भी कतराने लगे हैं। जनता की गाढ़ी कमाई से बने यह प्रोजेक्ट कब जनता के काम आना शुरू होंगे, इसका सटीक जवाब किसी अफसर के पास नहीं है।

सीएम के उद्घाटन के तीन महीने बाद भी ताले में बंद कनवेंशन सेंटर

झांसी विकास प्राधिकरण ने पॉलिटेक्निक के पास 65 हजार वर्ग फीट में 30 करोड़ की लागत से कनवेंशन सेंटर बनाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 अक्तूबर 2025 को इसका उद्घाटन करते हुए झांसी के लिए इसे सौगात बताया था लेकिन, तीन माह बाद भी यह ताले में बंद है। प्राधिकरण अफसरों ने भी इसका संचालन जल्द आरंभ कराने की बात कही थी लेकिन, अभी तक संचालन प्रक्रिया ही तय नहीं हो सकी। इस वजह से प्राधिकरण अफसरों ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है। यह कनवेंशन सेंटर में दस हजार लोगों की क्षमता के लिहाज से तैयार कराया गया था। यहां पार्किंग समेत अन्य व्यवस्थाएं भी की गईं। इस्तेमाल में न आने से यहां धूल जमती जा रही है।

करोड़ों खर्च होने के बाद भी ताले में बंद बुंदेलखंड सांस्कृतिक केंद्र

स्मार्ट सिटी मिशन के जरिये क्राफ्ट मेला मैदान में 2.19 करोड़ की लागत से पर्यटन सूचना केंद्र एवं 5.38 करोड़ की लागत से बुंदेलखंड सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण कराया गया था। इसके जरिये बुंदेलखंड की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देना था। यहां इंटरैक्टिव कियोस्क, कला कक्ष, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आधुनिक केंद्र बनाए गए। 29 अगस्त को 2023 को इसका लोकार्पण हुआ लेकिन, स्मार्ट सिटी मिशन अफसरों की लापरवाही से इसका संचालन कानूनी पचड़े में जा फंसा। इस वजह से तीन साल से यहां ताला बंद है। कई साल से ताला बंद होने से यह इमारत अपनी चमक धीरे-धीरे खोती जा रही है। इसका संचालन भी जल्द आरंभ होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती।

अरबन हाट में खर्च 22 करोड़ पर जमी धूल

झांसी विकास प्राधिकरण ने किले की तलहटी पर कला कर्मियों को अवसर उपलब्ध कराने के इरादे से करीब 22 करोड़ की लागत से अरबन हाट बनवाया। यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ हाट, फूड कोर्ट, एंफीथिएटर, लैंड स्केपिंग, ड्रेनेज समेत तमाम कार्य कराए गए। वर्ष 2020 में इसका निर्माण पूरा हो गया। इसके बाद आवंटन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। पिछले छह साल से अरबन हाट में ताला बंद है। दुकानों पर भी ताला लटक रहा है। वर्षों से इस्तेमाल न होने से यहां ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग आई। चारों ओर गंदगी फैली रहती है। करोड़ों रुपये से अरबन हाट अब नशेड़ियों के इस्तेमाल में आ रहा है। जगह-जगह शराब की खाली बोतलें पड़ी रहती हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद इसकी सुध लेने को अफसर राजी नहीं हैं।

 



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