जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने बिजौली ग्रोथ सेंटर स्थित एक पब्लिशिंग फर्म पर छापा मार कार्रवाई की। करीब नौ घंटे चली जांच के बाद फर्म ने डीआरसी-03 (डिमांड एंड रिकवरी सर्टिफिकेट) के जरिये 1.02 करोड़ रुपये जमा कराया। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 डी के सचान ने बताया कि फर्म द्वारा कर योग्य व करमुक्त दोनों तरह की बिक्री दिखाई जा रही थी। बावजूद इसके गलत ढंग से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) क्लेम किया जा रहा है। मामले की जांच चल रही है।

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इनपुट टैक्स क्रेडिट रिवर्सल व क्लेम में गड़बड़ी की सूचना पर ज्वाइंट कमिश्नर मनीष श्रीवास्तव के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर एसआईबी पुनीत अग्निहोत्री के साथ 20 अफसरों की टीम ने पब्लिशिंग फर्म पर छापा मारा। 9 घंटे तक चली छानबीन के बाद टीम ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पकड़ी। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 डीके सचान ने बताया कि फर्म के डेटा एनालिसिस में यह पाया गया कि कर योग्य एवं कर मुक्त दोनों तरह की बिक्री फर्म द्वारा दिखाई जा रही थी। लेकिन जीएसटी अधिनियम के तहत आईटीसी रिवर्सल नियमानुसार नहीं किया जा रहा था। इसके अतिरिक्त फर्म द्वारा ऐसी आईटीसी भी क्लेम की गई जो नियमानुसार नहीं ली जानी चाहिए थी। प्रथमदृष्ट्या गड़बड़ी पकड़े जाने पर फर्म मालिक ने 1.02 करोड़ रुपये जमा कर दिया है। टीम आगे के दस्तावेज खंगाल रही है। टीम में सहायक आयुक्त विपिन सोनकर, अमित सिंह, अरविंद निषाद, धर्मेंद्र कुमार, जितेंद्र वर्मा व नीरज राणा के अलावा राज्य कर अधिकारी शामिल रहे।



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