लोक निर्माण विभाग में तैनात लिपिक संतोष निरंजन को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद अब एंटी करप्शन टीम ने शिकंजा और कस दिया है। गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर ही उसकी बेनामी एवं अचल संपत्तियों समेत बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल भी शुरू कर दी है। एंटी करप्शन टीम को प्रारंभिक जांच में संतोष निरंजन की आय से अधिक संपत्ति का पता चला है।

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झांसी समेत आसपास के इलाकों में संतोष ने परिजनों के नाम से जमीन, मकान और प्लॉट खरीद रखे हैं। उसके पास तीन गाड़ियां भी हैं। कई बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और बड़े पैमाने पर डिजिटल लेनदेन का भी पता चला है। रिश्वतखोरी के इस नेटवर्क में संतोष निरंजन अकेला नहीं था। उसे विभाग के भीतर ही कुछ अफसरों का भी संरक्षण मिल रहा था। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही एंटी करप्शन टीम के रडार पर अन्य सरकारी विभाग के पेंशन अनुभाग के लिपिक भी आ गए हैं। उनके पास कई विभागों की शिकायतें पहुंची हैं। फिलहाल संतोष निरंजन न्यायिक हिरासत में है। एंटी करप्शन की टीम दस्तावेजी सबूतों के आधार पर उसकी चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा तैयार कर रही है। एंटी करप्शन प्रभारी शादाब खान का कहना है कि पुख्ता सुबूत के साथ मिलने वाली शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मंगलवार को एंटी करप्शन टीम ने पेंशन एवं ग्रेच्युटी के भुगतान के एवज में बीस हजार रुपये की रिश्वत लेते पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ लिपिक संतोष निरंजन को रंगे हाथ पकड़ा था। संतोष को बुधवार को झांसी स्थित कोर्ट में पेश किया गया।



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