नशा मुक्ति केंद्र बजट न मिलने से बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। हालात यह है कि करीब तीन माह से यहां कोई नया मरीज भर्ती नहीं हुआ। दिनों-दिन बदहाल होती जा रही व्यवस्थाओं के चलते पुराने मरीजों को भी उनके परिजन यहां से लेकर जाने लगे हैं।झांसी-शिवपुरी हाईवे के पास स्थित नशा मुक्ति केंद्र का संचालन स्वास्थ्य विभाग ने एक एनजीओ के हवाले कर रखा है। अक्तूबर से इसकी व्यवस्थाएं चरमराने लगीं।
मरीज के परिजनों ने बताया कि यहां न कोई डॉक्टर चेकअप के लिए आता है, न ही नर्स काम करती हैं। काउंसलर भी नहीं है। इस वजह से मरीजों की देखभाल नहीं हो रही है। मरीजों को खाना भी नहीं मिल रहा। परिजनों को भोजन की व्यवस्था करनी पड़ती है। केंद्र में सात कर्मचारियों की तैनाती है लेकिन छह माह से इनको वेतन नहीं मिला। ये कर्मचारी भी नियमित नहीं आते। सिर्फ दो-तीन लोगों के सहारे पूरा केंद्र चल रहा है। मैनेजर प्रिया शर्मा ने बताया कि उनको भी वेतन नहीं मिला। इससे कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुधाकर पांडेय का कहना है कि उनका काम सिर्फ जागरुकता अभियान चलाना है।
