स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में स्लोगन लिखाई से लेकर पेंटिंग कराने तक के लिए नगर निगम से 40 लाख रुपये बजट आवंटित हुआ था। इसके बावजूद तीन वर्कऑर्डरों में 1.23 करोड़ रुपये का काम दिखाकर भुगतान के लिए बिसात बिछा दी गई थी। अगर नगर आयुक्त जांच नहीं करवातीं तो ये खेल भी उजागर नहीं होता।

नगर निगम में होने वाली सदन की बैठक में अलग-अलग विभागों के लिए बजट का आवंटन किया जाता है। वर्ष 2025-26 के मूल बजट में स्वास्थ्य विभाग को स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत वाॅल पेंटिंग कराने के लिए 40 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। पिछले साल स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले जनवरी से मार्च तक महानगर में कई जगहों पर वॉल पेंटिंग से लेकर स्लोगन लिखवाने का काम कराया गया। एक तरफ जहां महानगर को स्वच्छ रखने के लिए स्लोगन लिखे जा रहे थे तो दूसरी तरफ फर्जीवाड़ा करने का खेल भी शुरू हो गया था। एक जेई से माप कराने के बाद तीन वर्कऑर्डरों में 1,23,88,601 रुपये का बिल बनाकर भुगतान के लिए फाइल नगर आयुक्त आकांक्षा राणा के पास भेज दी गई। नगर आयुक्त ने बिल देखने के बाद तीनों वर्कऑर्डरों की अलग-अलग जेई से फिर से माप करवा दी। फिर पूरा खेल उजागर हो गया। काम मात्र करीब 30 लाख का मिला और फिर लगभग 28 लाख का भुगतान किया गया।

तीन वर्कऑर्डर इतने-इतने के बने

31 जनवरी 2025 को जारी कार्यादेश का बिल 36,34,799 रुपये का बना।

दो फरवरी 2025 को जारी कार्यादेश का 48,18,999 रुपये का बिल बना।

26 मार्च 2025 को जारी कार्यादेश का बिल 39,34,801 रुपये का बनाया गया।

इनका यह है कहना

एनएसए और जेई से जवाब तलब अपर नगर आयुक्त राहुल कुमार यादव का कहना है कि इस मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धीरेंद्र गुप्ता और जेई देवीलाल शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



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