औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी का उत्पादन कर किसान अपनी आय बढ़ा रहे हैं। ग्रीन टी, तुलसी पाउडर आदि के उत्पादन के लिए प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की जाएगी। अभी जनपद में 2800 एकड़ में तुलसी की खेती की जा रही है। इकाई की स्थापना के बाद इसका रकबा और बढ़ाया जाएगा। डीएम ने तुलसी का रकबा बढ़ाने के लिए शासन को पत्र लिखा है।

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औषधीय उपयोग के कारण कई कंपनियां इसे किसानों से सीधे खरीद रही हैं। इससे उपज बेचना आसान हो गया है। बुंदेलखंड के बांदा, झांसी, जालौन, हमीरपुर आदि जिलों के लिए यह उत्तम फसल करीब तीन महीने में तैयार हो जाती है। इसके उत्पादन में ज्यादा मेहनत या देखभाल की आवश्यकता नहीं होती। प्रदेश सरकार तुलसी और एलोवेरा की खेती पर 30 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी देती है। एक हेक्टेयर तुलसी से लगभग 106 किलोग्राम तक तेल का उत्पादन हो सकता है। किसान अपनी आय और बढ़ा सकें, इसके लिए प्रॉसेसिंग यूनिट लगाई जाएगी। किसान में इसमें अपनी उपज भेजकर ग्रीन टी, तुलसी पाउडर आदि बनाकर इसे बाजार में बेच सकेंगे। उद्यान अधिकारी डॉ. प्रशांत ने बताया कि बरुआसागर में जल्द ही प्रॉसेसिंग यूनिट शुरू होने जा रहा है।



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