बहराइच के नंदा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान में बुंदेलखंड विवि के फार्मेसी विभाग की फर्जी डिग्री देने का खुलासा हुआ है। जांच के लिए आई पुलिस ने न सिर्फ मान्यता देने संबंधी दस्तावेजों की जांच की बल्कि फार्मेसी के विद्यार्थियों का डाटा भी खंगाला। जांच अधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया फर्जी डिग्री देने की पुष्टि हुई है।
बहराइच के रामगांव थाने में तैनात एसआई अयोध्या सिंह ने बताया कि नंदा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी से किशोरी लाल वर्मा की पुत्री ने फार्मेसी का पाठ्यक्रम पूरा किया। उसे बीयू के फार्मेसी विभाग की डिग्री थमाई गई। जब उसने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया में पंजीकरण के लिए आवेदन किया तो उसकी डिग्री फर्जी बताई गई। किशोरी लाल वर्मा ने तत्कालीन डीएम मोनिका रानी से शिकायत की। जांच में आरोप सही मिलने पर रामगांव थाने में संस्थान के चेयरमैन दिनेश कुमार वर्मा, प्रधानाचार्य सुरेंद्र कुमार सिंह और लिपिक सतीश कुमार वर्मा के खिलाफ अक्तूबर 2025 में मुकदमा दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए वह टीम के साथ आए हैं। हर रिकॉर्ड की जांच करने के बाद प्रथमदृष्टया नकली मार्कशीट देने की पुष्टि हुई है। चूंकि अभी एक ही छात्रा ने काउंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, जिससे मार्कशीट नकली होने की पुष्टि हुई है। उनका कहना है कि अब अन्य विद्यार्थियों को मिली मार्कशीट की भी जांच होगी, जिससे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
