मऊरानीपुर ब्लॉक के अंतर्गत तिलैरा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में बड़ा वित्तीय घपला सामने आया है। जिलाधिकारी की ओर से कराई गई जांच में खुलासा हुआ है कि ग्राम प्रधान और सचिव ने आपसी मिलीभगत से बिना कोई काम कराए 21.35 लाख रुपये का भुगतान करा दिया। जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान मनोज कुमार एवं सचिव रविशंकर राजपूत को नोटिस जारी किया गया है। दोनों से वसूली की तैयारी है।

हैंडपंप मरम्मत एवं रीबोर के नाम पर सबसे ज्यादा खेल

तिलैरा गांव निवासी आशीष, महेश, राम सजीवन समेत अन्य ने बीते साल दिसंबर महीने में जिलाधिकारी से मनरेगा के कार्यों एवं ग्राम पंचायत निधि में फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। उनका कहना था कि पंचायत सचिव रविशंकर राजपूत एवं ग्राम प्रधान मनोज कुमार ने साठगांठ करके चहेतों के नाम जॉब कार्ड बनवाने के साथ ही फर्जीवाड़ा करके रकम की बंदरबांट कर ली। जिलाधिकारी ने इसी साल जनवरी में इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। टीम को मौके पर कई तरह गड़बड़ियां मिलीं। सबसे अधिक हैंडपंप मरम्मत एवं रीबोर के नाम पर खेल हुआ। जांच रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत में इस काम पर 12.51 लाख रुपये खर्च किए गए लेकिन इससे संबंधित अभिलेख ग्राम पंचायत के पास नहीं मिले।

कागजों में नाली निर्माण

ग्राम पंचायत निधि से गोशाला बनवाई गई लेकिन वह मानक के मुताबिक नहीं थी। गोवंश के लिए हरा चारा समेत दाना भी नहीं था। जिन परिवार के यहां शौचालय बनवाए गए उनका एक से अधिक बार भुगतान दिखाकर पूरी रकम हड़प ली गई। इसके जरिये भी लाखों रुपये का गोलमाल हुआ। गांव में जयपाल बदरी जोशी के घर के पास नाली का निर्माण सिर्फ कागजों में मिला। इसमें भी 4.66 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ।

राजनारायण तिवारी के मकान से न्यू पांचाल के बाड़े के बीच मनरेगा के तहत 12 साल पहले निर्माण कराया गया था लेकिन नया निर्माण बताकर 1.66 लाख रुपये हड़प लिए गए। इसी तरह 2.55 लाख रुपये के नाली निर्माण में भी गड़बड़ी मिली। जांच टीम ने कुल 21,35,515 रुपये की गड़बड़ी पकड़ी है। यह रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है।

जांच रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। जांच टीम ने शिकायत सही पाई है। इस आधार पर ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिव से जवाब मांगा गया है। इनसे वसूली भी कराई जाएगी।– डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव, डीपीआरओ



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