मंडल के 697 वेटलैंड (आर्द्रभूमि) इन दिनों प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हैं। सर्द मौसम में लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी पक्षियों ने इन्हें अपना अस्थायी आशियाना बनाया है। बुंदेली धरा पर पानी, भोजन और सुरक्षित वातावरण मिलने से पक्षियों के कुनबे में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। माैसम अनुकूल होने से विदेशी मेहमानों के वापस होने की संभावना अभी बहुत कम है। इनकी गणना के लिए वन विभाग को आदेश का इंतजार है।

झांसी, ललितपुर और जालौन में छोटे-बड़े जलाशय के अलावा झील मिलाकर कुल 697 वेटलैंड वन विभाग के कागजों में दर्ज हैं। ललितपुर में सबसे ज्यादा 473, झांसी में 122 और उरई में 102 वेटलैंड हैं। इनमें से कुछ जगहों पर अठखेलियां करते ये प्रवासी परिंदे पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। इन विदेशी मेहमानों को निहारने के लिए पर्यटक के साथ स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी भी पहुंच रहे हैं। जनपद में सुकुवां-ढुकुवां, सिमरधा, पारीछा, गढ़मऊ झील सहित अन्य जलाशयों पर कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी कलरव करते नजर आ रहे हैं। इनकी संख्या अभी विभाग ने दर्ज नहीं की है। आदेश आने के बाद सुबह-शाम इनकी गणना की जाएगी।

पिछले साल आई थी 22 प्रकार की प्रजाति

पिछले साल जब गणना हुई थी तब 22 प्रकार की प्रजातियां पाई गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि वेटलैंड में आए पक्षी मार्च तक यहीं रहेंगे। यहीं बच्चों को जन्म देने के बाद ये उनके साथ ही लौटेंगे। मार्च तक उनके बच्चे लंबी उड़ान भरने लायक हो जाते हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि आर्द्रभूमि क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने और अवैध शिकार से बचें ताकि मेहमान परिंदे सुरक्षित वातावरण में अपना प्रवास पूरा कर सकें।

इन प्रजातियों के पक्षी आए

लिटिल कारमोरेंट, पोंड हिरोह, ग्रे हेरन, लार्ज इयरट, इंटमीडिएट अर्गेट, कैटल अर्गेट, कॉम्ब डक, लेथर व्हीसिल डक, व्हाइट ब्रेस्ट वाटरहेन, पर्पल मोरहेन, कॉमन कूट, ब्रोंविंग्ड जकाना, वायर टेल्ड शेलो, व्हाइट ब्रेस्टड किंगफिशर, ब्लैक हेडेड गुल, कॉमन सेंडबाइपर, रेड हेडेड पोचार्ड, कॉमन प्रोचार्ड, रेल वॉटल्ड लापिंग, वैगटेल, कॉमन किंगफिशर, आरियांटल मैगबाई रॉबिन।

प्रवासी पक्षियों की निगरानी के लिए वन विभाग के कर्मियों के अलावा गांव के स्वयंसेवियों को भी निगरानी में लगाया गया है ताकि उनका कोई आखेट नहीं कर सके। इनकी गणना आदेश मिलने के बाद ही होगी।– नीरज आर्या, डीएफओ



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