प्रेमनगर के नगरा निवासी बुजुर्ग राजेश कुमार शर्मा के खाते से साइबर ठगों ने 3.48 लाख रुपये उड़ा दिए। मोबाइल पर मैसेज आने के बाद उनको ठगी का पता चला। उनकी तहरीर पर प्रेमनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

बुजुर्ग राजेश कुमार शर्मा ने पुलिस को बताया कि यूपीआई लेनदेन के लिए उन्होंने एक अनजान व्यक्ति से मदद ली थी। इसके बाद उन्होंने यूपीआई का अधिक इस्तेमाल नहीं किया लेकिन, उनके खाते से लगातार पैसे निकाले जाते रहे। आरोप है कि 7 से 21 नवंबर 2024 के बीच 1000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई। कुछ महीने पहले मैसेज आने पर उन्होंने बैंक डिटेल्स निकलवाई। उसमें 24 दिन के भीतर 3.48 लाख रुपये निकाले गए थे। यह देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना प्रेमनगर पुलिस को दी। एनसीआरपी पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। थाना प्रभारी तुलसीराम पांडेय के मुताबिक प्राथमिकी दर्ज कर जालसाज की तलाश की जा रही है।

बचाव के लिए सतर्कता सबसे जरूरी

साइबर विशेषज्ञ डा. मनीष निगम का कहना है कि साइबर फ्राड से बचने के लिए सतर्कता सबसे अहम है। उनका कहना है कि धोखाधड़ी का शिकार होने पर सबसे पहले 1930 पर कॉल करके शिकायत www.cybercrime.gov.in पर दर्ज करानी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतनी ही संभावना होती है कि बैंक उस लेन-देन को रोक सके। इससे पैसा वापस मिलने की संभावना अधिक रहती है। इसके साथ ही संबंधित बैंक शाखा को तुरंत लिखित सूचना देना आवश्यक है।

आवश्यक नियम भी ध्यान रखना चाहिए

बैंक कभी फोन पर पिन, सीवीवी नंबर, यूजर आईडी या पासवर्ड नहीं मांगता।

यूपीआई की ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ किसी अनजान व्यक्ति से स्वीकार न करें।

केवाईसी अपडेट के लिए भेजे गए किसी लिंक पर क्लिक न करें।

मोबाइल में रिमोट एक्सेस एप का इस्तेमाल न करें।

गूगल पर दिख रहे कस्टमर केयर नंबर पर भरोसा न करें।

बैंक और यूपीआई एप में मजबूत पासवर्ड एवं बायोमैट्रिक लॉक लगाकर रखें।

सप्ताह में एक बार अवश्य स्टेटमेंट चेक करें।

अज्ञात क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें।



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