पानी न पहुंचने और सड़कों की खोदाई के बाद उनकी मरम्मत न होने से महोबा में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के खिलाफ गुस्सा यूं ही नहीं फूट पड़ा बल्कि झांसी में भी इसी तरह के हालात हैं। यहां भी जल जीवन मिशन के तहत तीन जल परियोजनाओं का काम अधूरा पड़ा है। 613 गांवों में पानी पहुंचाने का लक्ष्य था लेकिन, समय सीमा खत्म होने के बाद पचास फीसदी गांवों में नियमित आपूर्ति आरंभ नहीं हुई। फाइलों में जिन जल परियोजनाओं का काम पूरा दिखाया गया, वहां भी तमाम गांव में पाइप लाइन बिछाने के बाद भी टोंटी से बूंद नहीं टपकी। यहां जलापूर्ति आरंभ होने का अभी भी इंतजार है। वहीं, पाइप लाइन के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत भी नहीं कराई गई।

पांच साल बीत जाने के बाद भी नहीं मिल पाया लाभ

केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने हर घर जल के जरिये नलों से घर तक पानी पहुंचाने की कवायद शुरू की थी। करीब 1,465 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना की मदद से 613 गांव के 2.09 लाख घरों तक पानी पहुंंचाया जाना था। पांच साल बीत जाने के बाद करीब 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका, जबकि 40 फीसदी काम अधूरा है। जल निगम अभियंताओं का कहना है कि दस जल परियोजनाओं में गुलारा, बचावली, तिलैथा, बुढ़पुरा, कुरैचा, पुरवा व बढ़वार से पानी पहुंचाया जा रहा, जबकि इमलौटा, बरथरी व टेहरका अभी अधूरी हैं। कहीं टेस्टिंग नहीं हो पा रही, तो कहीं जल संयोजन अधूरा है। कई जगह पाइप लाइन का काम भी पूरा नहीं हुआ। अब तक सिर्फ 385 गांव तक ही पानी पहुंच सका जबकि 228 गांव के लोग पानी का इंतजार ही कर रहे हैं। इतना समय बीत जाने के बाद भी सभी गांव तक पानी की आपूर्ति आरंभ नहीं हो सकी। जिन 385 गांव तक पानी पहुंचा देने की बात कही जा रही है, वहां भी नियमित तौर पर पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है।

बजट न होने से अटक गया काम

जल जीवन मिशन के लिए केंद्र सरकार की ओर से फंड दिया जा रहा था लेकिन, काम पूरा होने से पहले ही सरकार ने पैसा देना बंद कर दिया। पिछले करीब एक साल से केंद्र सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया। इस वजह से दो सौ करोड़ से भी अधिक की देनदारी हो चुकी है। बजट न होने से काम ठप पड़ गया। नई दिल्ली की बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को 286 गांव तक पानी पहुंचाना था। जल निगम अफसरों के मुताबिक करीब 550 करोड़ रुपये का काम कंपनी को करना था, लेकिन कंपनी ने काम की रफ्तार सुस्त कर दी। समय सीमा खत्म हुए करीब 18 माह बाद भी कंपनी अपना काम पूरा नहीं कर सकी। समय पर काम पूरा न होने से 60 करोड़ का जुर्माना लगा, इसके बावजूद काम अधूरा है। अब उम्मीद जताई जा रही थी कि बजट में जल जीवन मिशन के फेज टू को मंजूरी मिलने से पैसा जारी हो सकता है।

बजट न होने की वजह से अभी तक अटका हुआ था। अब राज्य सरकार की ओर से बजट जारी हुआ है। शेष काम भी जल्द आंरभ कराया जाएगा। जो भी काम अधूरे हैं, उसको भी पूरा कराया जाएगा। रणविजय सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण



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