देश की महारत्न कंपनियों में शुमार भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। एक सेवानिवृत्त कर्मी की मौत के 52 माह बाद भी खाते में पेंशन की रकम भेजी जाती रही। ऑडिट में भी यह मामला पकड़ा नहीं जा सका जबकि हर साल जीवित प्रमाण पत्र भी जमा होना होता है। इसके बावजूद खाते में रकम लगातार जाती रही। चार साल बाद परिवार में उत्तराधिकार मामला निपटने के बाद जब परिजन उनका पैसा निकालने बैंक पहुंचे, तब यह बात सामने आई। अब बैंक ने यह खाता फ्रीज कर दिया। परिजन खाते में जमा मूल रकम देने की मांग कर रहे हैं लेकिन बैंक उनको यह रकम भी नहीं लौटा रहा है।

सिमरावारी निवासी भगवान दास पाथरे वर्ष 2019 में भेल से सेवानिवृत्त हुए थे। परिजनों ने बताया कि 21 अगस्त 2021 में बीमारी से उनकी मौत हो गई। उनका बैंक खाता भेल स्थित एसबीआई में था। उनकी मृत्यु के बाद परिजनों ने भेल को पेंशन बंद करने की सूचना दी। बैंक में भी मृत्यु प्रमाणपत्र जमा करा दिया लेकिन परिवार में उत्तराधिकार पर निर्णय न होने की वजह से खाते से पैसे नहीं निकाल सके।

31 अक्तूबर को सिविल जज ने उत्तराधिकारी के तौर पर उनकी बहू छाया पाथरे के पक्ष में आदेश दिया। इसके बाद छाया ससुर के खाते में जमा 5.02 लाख की राशि लेने बैंक पहुंचीं। यहां कागज निकालने पर मालूम चला कि भगवान दास की मृत्यु के बाद भी पेंशन के तौर पर 59 महीने तक भेल से रकम आती रही। यह देखकर बैंक अफसर भी हैरान रह गए। हर महीने पैसे आने की वजह से खाता भी सक्रिय था। उसमें कई लाख रुपये जमा हो चुके थे। बैंक कर्मियों ने पैसा देने से इन्कार कर दिया।

छाया के मुताबिक उसने ससुर के खाते में पहले से जमा 5.02 लाख रुपये देने की मांग की। बैंक अफसरों ने इसे भी देने से मना कर दिया। बैंक अफसरों का कहना था कि जब तब अतिरिक्त राशि वापस नहीं हो जाती तब तक पैसा नहीं दिया जा सकता। पिछले तीन माह से छाया अफसरों के चक्कर काट रही है लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। अब उसने बैंक अफसरों को कानूनी नोटिस भेजी है। इस संबंध में भेल के जनसंपर्क अधिकारी अंकुर जैन से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।



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