मेडिकल कॉलेज के ऑपरेशन थियेटर (ओटी) ब्लॉक में तैनात टेक्नीशियन कोरोना काल से मूल पद का काम नहीं कर रहे हैं। कोई एंबुलेंस की मरम्मत एवं डीजल खपत का रिकॉर्ड बना रहा है तो कोई वेंटिलेटर व ऑक्सीजन सप्लाई का लेखाजोखा रख रहा है। वहीं, ईसीजी टेक्नीशियन को पीआरओ बना दिया गया है जबकि यह पद सृजित ही नहीं है।
खास यह कि गंभीर रूप से भर्ती रोगियों का ईसीजी अन्य कर्मी करते हैं। ओटी टेक्नीशियन ऑपरेशन के दौरान सर्जन एवं बेहोशी के डॉक्टर की तकनीकी मदद करता है। ऑपरेशन में किस-किन उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है, वह उनकी व्यवस्था भी करता है। कोरोना काल में ऑपरेशन लगभग बंद हो गए थे, इसके चलते एक टेक्नीशियन को एंबुलेंस की मरम्मत व डीजल खर्च का ब्योरा रखने आदि का काम सौंपा गया था। दूसरे टेक्नीशियन को वेंटिलेटर के मेंटीनेंस और तीसरे को ऑक्सीजन प्लांट एवं सप्लाई व्यवस्था के मेंटीनेंस की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, ईसीजी टेक्नीशियन को पीआरओ बनाने के साथ पर्चे बनवाने की व्यवस्था देखने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन, जिम्मेदारों ने अभी तक इन कर्मियों को उनके मूल पद पर नहीं भेजा। इस कारण ऑपरेशन के दौरान टेक्नीशियन का काम जेआर (जूनियर रेजीडेंट) अथवा एसआर (सीनियर रेजीडेंट) से लिया जा रहा है। सर्जनों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान टेक्नीशियन न होने से परेशानी हो रही है। ओटी ब्लॉक प्रभारी डॉ. रूपेश कुमार ने बताया कि प्राचार्य के साथ जल्द बैठक होगी, जिसमें यह मामला रखा जाएगा।
