महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के इलाज को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) संचालित वेंटिलेटर की सुविधा शुरू होने जा रही है। यह अत्याधुनिक वेंटिलेटर मरीज के शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को खुद ही नियंत्रित करेगा। नवीनतम तकनीक से लैस वेंटिलेटर मरीज की सांसों की गति और अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर का लगातार विश्लेषण करेगा।
सेंसर रोगी की तबीयत को भांपकर करेंगे काम
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तकनीक से आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के काम का बोझ भी कम होगा। मेडिकल कॉलेज के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एआई आधारित छह वेंटिलेटर की मांग शासन को भेजी थी, जो स्वीकृत हो गई है। दो वेंटिलेटर आ भी गए हैं और फरवरी के अंत तक शेष चार वेंटिलेटर मिलने की संभावना है। सभी के आने पर एक साथ इन्हें इंस्टाॅल किया जाएगा। इसकी खूबी यह है कि नवजात हो या बुजुर्ग, किसी उम्र के रोगी को भी भर्ती करके इससे उपचारित किया जा सकता है। बताते चलें कि बच्चों और बड़ों के वेंटिलेटर अलग-अलग होते हैं। अभी इन पर ऑक्सीजन की आपूर्ति का दबाव चिकित्सक ही तय करता है, जिससे कभी-कभार भूल की आशंका रहती है। मगर एआई संचालित वेंटिलेटर में लगे सेंसर रोगी की तबीयत को भांपकर सटीक काम करते हैं।
मरीज की तबीयत बिगड़ने पर अलार्म से करेगा अलर्ट
मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंदेल ने बताया कि रोगी को भर्ती करते समय एआई संचालित वेंटिलेटर पर जैसे ही उम्र, वजन आदि का ब्योरा दिया जाता है, वैसे ही उसका मोड बदल जाता है। इससे रोगी को ऑक्सीजन की आपूर्ति का प्रेशर कम अथवा ज्यादा करने की जरूरत नहीं होती है। यदि रोगी की तबीयत में गिरावट आती है तो वेंटिलेटर से अलार्म बजेगा जिससे चिकित्सक तत्काल उसके पास पहुंच सके। यही नहीं, इसके जरिये जरूरत के हिसाब से जीवन रक्षक दवा भी रोगी को दी जा सकेगी।
