होली खेलते समय कोई गुलाल उड़ाता है तो कोई रंग लगाता है। पानी से भरे गुब्बारे फेंके जाते हैं और रंगीन पानी भी डाला जाता है। इस दौरान लोग आंख की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं होते, जो घातक हो सकता है।
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शमी का कहना है कि हर वर्ष होली के बाद ऐसे कई मामले आते हैं, जिनमें आंखों में रंगों के कणों से घाव हो जाता है या नजर धुंधली हो जाती है। आंख में जलन, लालिमा व दर्द आम बात होती है। रंगों में प्रायः लेड ऑक्साइड, मरकरी और कॉपर सल्फेट जैसे रसायन होते हैं। जैसे ही ये आंखों के संपर्क में आते हैं, वैसे ही तीव्र जलन, लालिमा व असहनीय दर्द होता है। जब रंग के कण आंखों में जाते हैं तो कॉर्निया पर खरोंच व घाव हो सकते हैं। इससे न केवल असहनीय दर्द होता है बल्कि संक्रमण का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
उन्होंने सलाह दी कि होली से पहले या बाद में आंख के आसपास क्रीम या तेल न लगाएं। इससे रंग के कण आंख की सतह पर चिपक जाते हैं। यदि रंग अधिक समय तक आंख में रहे या उपचार में देरी हो तो रोशनी स्थायी रूप से जा सकती है। उन्होंने बताया कि होली के बाद आंख में जलन, खुजली, सूजन, लालिमा या दृष्टि में कोई बदलाव महसूस हो रहा है तो नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं। 48 घंटों बाद भी ये लक्षण प्रकट हो सकते हैं।
