बेंगलुरू राजधानी एक्सप्रेस में बेटिकट सवार हुआ यात्री टिकट चेकिंग स्टाफ से बचने के लिए 405 किलोमीटर तक शौचालय में छिपा रहा। टीटीई की शिकायत पर सीएण्डडब्ल्यू स्टॉफ ने शौचालय का गेट खोलकर यात्री को बाहर निकाला। टीटीई स्टाफ के समझाने के बाद यात्री ने 6975 रुपये का जुर्माना भरा। वह सिकंदराबाद जा रहा था और खुद को फौजी बता रहा था।
हजरत निजामुद्दीन से चलकर बेंगलुरू जा रही राजधानी एक्सप्रेस (22692) के कोच नंबर बी-1 में एक यात्री हजरत निजामुद्दीन से सवार हुआ। गाड़ी के चलते ही टीटीई सुरेश कुमार पांडेय ने टिकट मांगा। यात्री ने कहा कि सीट पर बैठ जाने दो, इसके बाद टिकट दिखाता हूं। टीटीई दूसरे यात्रियों को चेक करने लगा। कुछ देर बाद उसे यात्री कोच में नहीं दिखा तो उसकी खोजबीन की। बाद में शौचालय गए यात्रियों ने टीटीई को बताया कि शौचालय काफी देर से अंदर से बंद है। टीटीई शौचालय का गेट चेक करने गया तो वह अंदर से बंद मिला। टीटीई को संदेह हुआ तो उसने कोच अटेंडेंट से निगरानी करने के लिए कहा। ग्वालियर तक दरवाजा नहीं खुला तो टीटीई ने इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दी। रात करीब 12:30 बजे झांसी आई ट्रेन में डिप्टी सीटीआई सीएण्डडब्ल्यू स्टाफ के साथ पहुंचे। यात्री से शौचालय से बाहर निकलने को कहा, फिर भी दरवाजा नहीं खोला। बाद में किसी तरह दरवाजा खुलवाया गया। इसके बाद यात्री को टीटीई स्टाफ ने जेल भेजने की चेतावनी दी। हालांकि, 6975 रुपये का जुर्माना वसूलने के बाद यात्री को छोड़ दिया गया।
