रविवार शाम कोतवाली के गुदरी मोहल्ला निवासी सौरभ पाटवा के पुत्र युवराज (14) की लक्ष्मीताल में डूबने से मौत हो गई। लक्ष्मीताल में निगरानी के कोई इंतजाम नहीं हैं। इस वजह से किशोर अपने दोस्त के साथ बिना रोकटोक तालाब के अंदर तक जा पहुंचा। बचावकर्मियों के न आने से उसे बचाया नहीं जा सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोस्त को बचाने के दौरान युवराज की डूबने से मौत हुई। उसकी मौत से मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है।

विवाह पंचमी पर स्थापित की थी गणेश प्रतिमा

गुदरी निवासी सौरभ की सराफा बाजार में मंगलसूत्र, बीजासेन आदि गुहने की दुकान है। उनका बड़ा बेटा युवराज निजी स्कूल में सातवीं का छात्र था। परिजनों ने बताया कि युवराज रोजाना लक्ष्मीताल के पास एक मंदिर में पूजा करने जाता था। वहां विवाह पंचमी पर गणेश प्रतिमा स्थापित थी। इस प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए शाम करीब चार बजे वह पड़ोस में रहने वाले शुभ अग्रवाल (11) के साथ लक्ष्मीताल जा पहुंचा। प्रतिमा लेकर दोनों गहरे तालाब में उतरने लगे। प्रतिमा लेकर शुभ तालाब की गहराई में चला गया और तभी गड्ढे में फंसकर वह डूबने लगा।

युवती ने शुभ को बचा लिया लेकिन युवराज नहीं बच सका

दोस्त को डूबते देख युवराज उसे बचाने की कोशिश में आगे बढ़ा लेकिन वह भी डूबने लगा। दोनों बचाने के लिए शोर मचाने लगे। शोर सुनकर वहां मौजूद एक युवती ने किसी तरह दुपट्टे से शुभ को बाहर खींच लिया जबकि युवराज को नहीं निकाला जा सका। कुछ और लोगों के आने पर युवराज को भी निकाला गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सीओ सिटी लक्ष्मीकांत गौतम का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

पानी में विसर्जित न करने से नाराज हो जाएंगे भगवान

युवराज की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता सौरभ ने बताया कि रोजाना की तरह दोपहर करीब तीन बजे युवराज उसे खाना देने दुकान पर आया था। खाना देकर मंदिर चला गया। रोजाना युवराज मंदिर में कई घंटे रहता था। उसके साथ मौजूद शुभ ने रोते हुए बताया कि वे दोनों भगवान को पानी के गहराई में विसर्जित करना चाहते थे। युवराज का कहना था कि बाहर विसर्जित करने से भगवान जी नाराज हो जाएंगे। इस वजह से दोनों तालाब की गहराई में चले गए। उधर, युवराज के पिता सौरभ ने मंदिर प्रबंधन पर जानबूझकर उनके बेटे को लक्ष्मीताल में भेजने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मंदिर के लोग लक्ष्मीताल की गहराई जानते थे। इसके बावजूद उसे प्रतिमा विसर्जन के लिए वहां अकेले भेज दिया।

39.49 करोड़ खर्च होने के बावजूद दुर्घटनाओं को दावत दे रहा लक्ष्मीताल

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लक्ष्मीताल को सजाने-संवारने पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। पाथ वे समेत लैंड स्केपिंग कराई गई। इसके चलते यहां घूमने आने वालों की संख्या बढ़ गई लेकिन सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ताल के बाहरी हिस्से में जाली लगवाई गई थी, वह भी कई जगह से टूट गई। इस वजह से हमेशा दुर्घटना की आशंका रहती है। ताल के आसपास निगरानी के इंतजाम नहीं हैं। इस वजह से किशोर की डूबकर मौत हुई।

बाहर लगी जाली कई जगह से टूटकर हो गई नष्ट, जलकुंभी से पट गया ताल

लक्ष्मीताल के सुंदरीकरण पर स्मार्ट सिटी मिशन से 39.49 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इन पैसों से ताल के बीचों-बीच महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित किए जाने के साथ ही यहां ताल के चारों ओर पाथ वे निर्माण, पार्किंग, आधुनिक बोट एवं बोटिंग डेक, खाने-पीने की दुकानें, ताल को निहारने के लिए व्यू प्वांइट, पार्क के चारों ओर लैंड स्केपिंग, सुंदर लाइट लगाने समेत अन्य कई कार्य कराए गए लेकिन देखरेख न होने से इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। नगर निगम इसके संचालन का ठेका कराने की कोशिश कर चुकी है। हालत यह है कि पूरा लक्ष्मी ताल जलकुंभी से पटता जा रहा है।

लक्ष्मीताल में जो कमियां हैं, उसे चिह्नित कर दूर कराया जा रहा है। इसके लिए कार्ययोजना बनाई गई है। लक्ष्मीताल की देखरेख के लिए कई फर्म से बात चल रही है। जल्द ही यह काम भी करा लिया जाएगा। ताल से जलकुंभी हटवाने का भी काम कराया जाएगा। – आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त



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