झांसी के कई युवाओं ने अपनी प्रतिभा की बदौलत विदेश में नौकरी पाई है। वर्षों से विदेश में रहकर भी वह अपनी माटी को नहीं भूले हैं। अपने स्तर से लगातार शहरवासियों की मदद भी करते रहते हैं। इसके अलावा लगातार हो रहे विकास कार्यों से बदलती हुई झांसी की तस्वीर के बारे में भी परिजनों से पूछते रहते हैं।

हिमानी हर साल आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की करतीं मदद

शिवाजी नगर की हिमानी गुप्ता अमेरिका के कैलिफोर्निया में रह रही हैं। वह 2015 में सूचना प्रणाली में मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए अमेरिका गई थीं फिर उनका कैंपस प्लेसमेंट होने पर गूगल में नौकरी मिल गई। अभी वह गूगल मुख्यालय में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं मगर झांसी और यहां के लोगों के प्रति उनका लगाव पहले जैसा ही है। उनकी मां अर्चना गुप्ता निजी स्कूल की प्रधानाचार्य हैं। उन्होंने बताया कि यहां पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को किताब, ड्रेस आदि उपलब्ध कराने के लिए हर साल आर्थिक सहायता भी करती हैं। इसके अलावा कोरोना काल में भी उन्होंने निजी अस्पताल को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए थे।

अविनाश शुरू से रहे मेधावी, अब अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर

पंचकुइया निवासी अविनाश चतुर्वेदी शुरू से ही मेधावी रहे हैं और अब अमेरिका के फ्लोरिडा में टीसीएस में बतौर सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम कर रहे हैं। वह अमेरिका में पिछले आठ साल से नौकरी कर रहे हैं। बीबीसी से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद इंजीनियरिंग की। फिर दिल्ली, गुरुग्राम में नौकरी की। इसके बाद नोएडा में टीसीएस में उनकी नौकरी लग गई। वहां से उन्हें अमेरिका डेढ़ महीने के प्रोजेक्ट के लिए भेजा गया। काम अच्छा होने पर वहीं पर उनकी नौकरी लग गई। वह नियमित झांसी आते रहते हैं। जब भी यहां आते हैं तो आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को स्टेशनरी उपलब्ध कराते हैं। परिजनों ने बताया कि वह झांसी के विकास आदि पर अक्सर चर्चा भी करते रहते हैं।



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