खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में शुद्धता की कसौटी पर दूध, मैदा, बेसन, गुड़ और सरसों तेल फिसलते पाए गए हैं। दो महीने पहले प्रयोगशाला भेजे गए 27 फीसदी नमूने तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर सके। हालांकि राहत की बात यह है कि इनमें कोई भी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक श्रेणी में नहीं मिला है। वहीं, बिना पंजीकरण दुकान चलाने और मानकों पर खरे न उतरने पर निजी कंपनी और छह दुकानदारों पर न्यायालय ने 3.95 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों में लगातार नमूने एकत्र कर जांच करवाई जा रही है। वैन के जरिये भी कई जगह पर शिविर लगाकर मौके पर ही खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है। दो महीने पहले भेजे गए 41 नमूनों की जांच रिपोर्ट आई है। इनमें 11 नमूने फेल मिले हैं। मैदा का एक और बेसन के तीन नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। रखरखाव सही न होने पर इनमें नमी ज्यादा मिली है।
इसके अलावा सरसों तेल के तीन नमूने फेल हो गए हैं। वहीं, दूध के तीन नमूनों में ज्यादा पानी मिला होने की पुष्टि हुई है। इन नमूनों में वसा की मात्रा कम पाई गई है। वहीं गुड़ का एक नमूना भी फेल मिला है, इसमें बाह्य पदार्थ मिला होने की पुष्टि हुई है। हालांकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं पाया गया है।
फेल होने वाले नमूनों की संख्या घटी
राहत की बात यह है कि इस बार फेल होने वाले नमूनों की संख्या घट गई है। सामान्य तौर पर खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग की तरफ से भेजे जाने वाले 70 फीसदी नमूने फेल मिलते थे। इस बार महज 27 प्रतिशत नमूने ही फेल हुए हैं। विभागीय अफसरों का कहना है कि लगातार की जा रही कार्रवाई का यह असर है।
पांच महीने में 31 क्विंटल खराब मावा, मिल्क केक, रसगुल्ले कराए नष्ट
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बीते पांच महीने में 31 क्विंटल खराब मावा, मिल्क केक, रसगुल्ले नष्ट कराए हैं। इनमें झांसी बस स्टैंड पर 11.5 क्विंटल मिल्क केक और तीन क्विंटल रसगुल्ला, 12 क्विंटल मावा गुरसराय में व पांच क्विंटल खोआ बरुआसागर में नष्ट कराया गया है।
इन कारणों से इन पर लगा जुर्माना
साबूदाना का आकार गोल न होने पर आशीष साहू पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगा है।
मिस ब्रांडेड नमकीन की बिक्री करने पर रितिक कुमार पर 10 हजार जुर्माना लगाया है।
मानक पर कुट्टू का आटा खरा न उतरने पर हरिओम साहू पर 30 हजार जुर्माना लगा है।
बेसन अधोमानक मिलने पर आयुष अग्रवाल पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
बिना पंजीकरण दुकान संचालन पर रंजीत और मो. राशिद पर 30-30 हजार जुर्माना लगा है।
एक निजी कंपनी का साबूदाना भी मानकों पर खरा न उतरने पर ढाई लाख रुपये जुर्माना लगा है।
मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार की जा रही कार्रवाई का असर अब दिखने लगा है। पहले की तुलना में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री में काफी कमी आई है। पहले जहां 70 फीसदी नमूने फेल मिलते थे, अब घटकर 27 फीसदी पर आ गए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज किए गए सात मामलों में एडीएम न्यायालय से 3.95 लाख जुर्माना भी लगा है। – पवन चौधरी, जिला अभिहित अधिकारी।
