बीते दो दिनों से हो रही बारिश के बाद फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासनिक अमला और कृषि विभाग की टीम मैदान में उतरी। ब्लॉकवार सर्वे के बाद सामने आया कि ओलावृष्टि न होने से खड़ी फसल सुरक्षित है, लेकिन खेतों में कटी पड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है।
मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर पहले ही आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की थी। इसके चलते कई किसानों ने समय रहते फसल काटकर सुरक्षित स्थानों पर रख ली थी। वहीं, कुछ किसानों ने कटाई के बाद फसल को खेतों में ही सूखने के लिए छोड़ दिया था। तेज हवा और बारिश के कारण ऐसी फसल भीग गई और कई जगह उड़ भी गई।
बारिश थमने के बाद प्रशासनिक अधिकारी, कृषि विभाग के कर्मचारी और लेखपाल नुकसान का आकलन करने पहुंचे। कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि इस समय अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की फसल खड़ी है, जबकि कुछ स्थानों पर कटाई हो चुकी है। भोजला क्षेत्र के निरीक्षण में करीब पांच प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया है।
उन्होंने बताया कि चिरगांव, मोठ और गुरसराय जैसे क्षेत्रों में धान के बाद बोई गई गेहूं की फसल अभी खड़ी है, जो ओलावृष्टि न होने के कारण सुरक्षित है। जिले में कुल मिलाकर पांच से दस प्रतिशत नुकसान का अनुमान है, जो मुख्यतः खेतों में कटी पड़ी फसल को हुआ है। बारिश के कारण दाने के काले पड़ने की आशंका है।
भूसे को भी नुकसान
कई किसानों ने फसल को सूखने के लिए इसलिए छोड़ा था ताकि थ्रेसर से गेहूं के साथ भूसा भी तैयार किया जा सके, लेकिन बारिश से भूसे को भी नुकसान पहुंचा है। किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजे के लिए पोर्टल पर आवेदन कर रहे हैं।
किसानों की पीड़ा
भोजला निवासी रमेश चंद ने बताया कि उन्होंने दो बीघा में गेहूं बोया था और कुछ दिन पहले ही फसल काटकर सूखने के लिए छोड़ी थी, लेकिन बारिश से पूरी फसल भीग गई, जिससे नुकसान हुआ है।
वहीं, मानवेंद्र ने बताया कि उन्होंने तीन बीघा में गेहूं बोया था। कुछ हिस्से की कटाई हार्वेस्टर से कर ली थी, जबकि बाकी फसल भूसा बनाने के लिए छोड़ी थी लेकिन बारिश से सब बर्बाद हो गया।
