नगर निगम में स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत कराए गए कार्यों में चार गुना तक बिल बनाने का मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि फर्म को जितना भुगतान किया गया, उससे कहीं अधिक काम वर्कऑर्डर में दिखाया गया था। इस पूरे मामले में कुछ विभागीय कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।

स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 के तहत महानगर में स्लोगन लेखन और पेंटिंग के कार्य कराए गए थे। इन कार्यों के लिए विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से करीब 1.23 करोड़ रुपये का बिल भुगतान के लिए लगा दिया गया था। इसी बीच अधिकारियों के पास शिकायत पहुंची कि जितना काम हुआ ही नहीं, उससे कई गुना अधिक भुगतान की तैयारी की जा रही है।

जब भुगतान की फाइल नगर आयुक्त के पास पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। शुरुआती स्तर पर एक ही जेई ने पूरे काम की माप पुस्तिका तैयार कर दी थी। इसके बाद तीन अन्य जेई से अलग-अलग वर्कऑर्डर की दोबारा जांच कराई गई। जांच में बड़े पैमाने पर गलत माप कर बिल तैयार किए जाने की पुष्टि हुई।

जांच के बाद कार्य की वास्तविक लागत घटकर लगभग एक चौथाई रह गई और निगम प्रशासन ने करीब 28 लाख रुपये का ही भुगतान किया। नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने बताया कि नगर निगम में कराए जा रहे सभी कार्यों का भुगतान गुणवत्ता और सत्यापन के बाद ही किया जा रहा है।

बिल में कैंची, पर कार्रवाई अब तक नहीं

नगर निगम प्रशासन ने बिल की राशि में भारी कटौती तो कर दी, लेकिन अब तक इस मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।



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