‘ऑपरेशन लगड़ा के तहत ‘पैर पर निशाना’ के पैटर्न पर हाईकोर्ट की सख्ती से पुलिस बल में खलबली मची है। हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देशों का पालन न होने पर अवमानना की कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया है। हाईकोर्ट की सख्ती से पुलिस मुठभेड़ में गिरावट की संभावना जताई जा रही है।

हर बार पैर में गोली पर सवाल

पिछले करीब एक साल के दौरान जिले में 48 पुलिस मुठभेड़ दर्ज हुईं। इन सभी घटनाओं में मिलाकर 56 बदमाशों को गोली लगी। हर बार गोली पैर में ही लगी। इस तरह से होने वाली मुठभेड़ पर कोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप बताते हुए इसे सजा देने का तरीका माना। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का पालन न होने पर अवमानना की चेतावनी दी। हाईकोर्ट के रवैये ने पुलिस अफसरों को बेचैन कर दिया है। हाईकोर्ट पहले भी मुठभेड़ के पैटर्न, पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच को लेकर सख्त रुख जता चुका। मुठभेड़ मामलों में पारदर्शिता, मेडिकल, फॉरेंसिक साक्ष्य और मजिस्ट्रियल जांच अनिवार्य है लेकिन, अमूमन इनकी भी परवाह नहीं होती है। ऐसे में झांसी का यह आंकड़ा आगे चलकर जांच और कानूनी कसौटी पर कस सकता है। वहीं, एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति का कहना है कि वांछित अपराधी अक्सर पुलिस पर फायरिंग करते हैं, जवाबी कार्रवाई में गोली लगती है। सभी कार्रवाई कानून के तहत की गई है।

मुठभेड़ में घायल बदमाश

जनवरी–मार्च 5, मई में 7, जून में 5, जुलाई में 4, अगस्त 3, सितंबर में 12 (सबसे ज्यादा), नवंबर में 7, दिसंबर में 2 बदमाश मुठभेड़ में घायल हो चुके हैं। कुल 56 बदमाश घायल और 111 गिरफ्तार हुए हैं।



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