पिता प्रेमनारायण डोंगरे साइबर कैफे चलाते हैं, जो कोविड काल में बंद रहा। इसके बाद प्रतिभा ने अपनी कला को आय का जरिया बनाने का फैसला लिया।
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पिता प्रेमनारायण डोंगरे साइबर कैफे चलाते हैं, जो कोविड काल में बंद रहा। इसके बाद प्रतिभा ने अपनी कला को आय का जरिया बनाने का फैसला लिया।
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