
हादसे के बाद…
– फोटो : अमर उजाला
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नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में लगी आग चंद मिनट में फैलकर दरवाजे तक पहुंच गई। इस वजह से भीतर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था। दमकलकर्मियों ने पीछे के रास्ते अंदर जाने की कोशिश की लेकिन, कामयाब नहीं हुए। इसके बाद वार्ड की खिड़की के कांच तोड़कर किसी तरह दमकलकर्मी अंदर पहुंचे।
अंदर आग की लपटों के साथ धुआं भरा था। आग लगने के करीब आधे घंटे बाद बचाव कार्य शुरू हो सका। इसके बाद दमकलकर्मियों ने नवजातों को बाहर निकालना शुरू किया। ग्राउंड फ्लोर होने से नवजात बाहर निकाले जा सके। अगर हादसा दूसरी मंजिल पर होता, तब बचाव कार्य में और मुश्किल होती। एसएनसीयू वार्ड की दो यूनिट हंै। एक यूनिट अंदर और दूसरी बाहर की तरफ है। सबसे पहले जो नवजात बाहर की ओर थे, उनको बाहर निकाला गया। अंदर की तरफ जो बच्चे थे, वो काफी झुलस गए। यहां भर्ती बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
गहन चिकित्सा कक्ष में सेफ्टी अलार्म भी नहीं बजा
नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में आग से बचाव के लिए सेफ्टी अलार्म लगाए गए थे लेकिन, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है आग लगने पर सेफ्टी अलार्म नहीं बजा। धुआं फैलने के बाद चारों ओर चीख-पुकार मच गई। अगर सेफ्टी अलार्म समय पर बजता तब बचाव कार्य जल्द शुरू हो सकते थे।
हादसा सिलसिलेवार
- रात करीब 10 बजे – मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में तेजी से धुआं उठा
- 10.05 बजे- नवजात को दूध पिला रही महिला चीखते हुए बाहर निकली
- 10.08 बजे- डॉक्टर व नर्सिंग स्टॉफ अंदर गया मगर तब तक धुआं भर गया
- 10.10 बजे- चीखपुकार मचते ही परिजन अपने-अपने नवजात को लेकर भागे
- 10. 24 बजे- फॉग लेकर दमकल मौके पर पहुंची और आग बुझाना शुरू किया
- 10.35 बजे- डीएम, एसएसपी, मंडलायुक्त और डीआईजी मौके पर पहुंचे
- 10.40 बजे- सेना की गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग बुझाना शुरू कर दिया
- 10.50 बजे- आग पर काबू पाया गया। अंदर घुसे डॉक्टर नवजातों को लेकर इमरजेंसी पहुंचे
- 11.20 बजे- डीएम, मंडलायुक्त व डीआईजी ने 10 बच्चों की मौत की पुष्टि की
